राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुई दो बड़ी घटनाओं—सैदुलाजाब में इमारत ढहने और हौज रानी में आग लगने—ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन दोनों हादसों में कुल 28 लोगों की जान चली गई। अब यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का समय पर पालन किया गया होता, तो शायद इन हादसों को रोका जा सकता था।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 25 मार्च को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए दिल्ली समेत सभी राज्यों और स्थानीय निकायों को उन संपत्तियों की पहचान करने के निर्देश दिए थे, जहां निर्धारित उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अदालत ने ऐसे मामलों की विस्तृत जानकारी जुटाने और कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एमसीडी आयुक्त ने 20 अप्रैल को सभी जोनल उपायुक्तों को निर्देश जारी कर एक सप्ताह के भीतर सर्वे कराने को कहा था। इस सर्वे का उद्देश्य उन रिहायशी भवनों की पहचान करना था, जिनका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। हालांकि, जमीनी स्तर पर यह अभियान अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका।
सूत्रों के अनुसार, कई इलाकों में सर्वे और संभावित कार्रवाई का विरोध शुरू हो गया। जनप्रतिनिधियों और स्थानीय स्तर पर दबाव की वजह से कई मामलों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाके में तो कथित रूप से रातों-रात दुकानों के शटर हटाकर दीवारें खड़ी कर दी गईं ताकि व्यावसायिक उपयोग को छिपाया जा सके। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर सीलिंग या अन्य कार्रवाई नहीं हो सकी।
मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो एमसीडी ने अपने हलफनामे में मास्टर प्लान के विभिन्न प्रावधानों का हवाला दिया। लेकिन 25 मई की सुनवाई के दौरान अदालत ने रिपोर्ट से असंतोष जताते हुए कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने संकेत दिया कि अवैध निर्माण और भूमि उपयोग उल्लंघन के मामलों में प्रशासन और नियम तोड़ने वालों के बीच मौन सहमति जैसी स्थिति दिखाई देती है। अदालत ने एमसीडी को अगली सुनवाई में विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि जिन दो संपत्तियों में हालिया हादसे हुए, वे मूल रूप से रिहायशी श्रेणी की थीं, लेकिन उनका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे भवनों की पहचान कर सुरक्षा मानकों की जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाती, तो इन दुर्घटनाओं की आशंका काफी हद तक कम हो सकती थी।
अब इन हादसों के बाद एक बार फिर अवैध निर्माण, भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। लोगों की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन कर भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जाए।
यह भी पढे
युवाओं के आंदोलन ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल https://kinnitimes.com/?p=30261
जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन, युवाओं के आंदोलन से सियासत में हलचल! https://www.facebook.com/share/p/1CguNnoWTC/







