पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बार फिर टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान की तैयारी में जुट गया है। ट्रंप प्रशासन कथित तौर पर ‘ऑपरेशन स्लेजहैमर’ नाम की संभावित कार्रवाई पर मंथन कर रहा है। माना जा रहा है कि यदि युद्धविराम टूटा तो आने वाले दिनों में बड़े सैन्य हमले शुरू हो सकते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और इजरायल युद्धविराम के बाद अब तक की सबसे बड़ी सैन्य तैयारियों में लगे हुए हैं। दावा किया जा रहा है कि अगले सप्ताह से ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। इस अभियान में स्पेशल ऑपरेशन फोर्स की तैनाती भी संभव बताई जा रही है, ताकि जमीन के अंदर छिपे परमाणु ठिकानों और हथियारों का पता लगाया जा सके।
बताया जा रहा है कि मार्च महीने में ही अमेरिका ने पश्चिम एशिया में सैकड़ों स्पेशल फोर्स जवान भेज दिए थे। अब उन्हीं इलाकों से संभावित कार्रवाई शुरू होने की चर्चा तेज हो गई है। वहीं चीन दौरे के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच ईरान मुद्दे पर हुई बातचीत के बाद अमेरिकी रुख और सख्त माना जा रहा है।
दूसरी ओर ईरान ने भी अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं। तेहरान का कहना है कि पिछले हमलों में क्षतिग्रस्त हुए एयर डिफेंस सिस्टम को फिर से सक्रिय किया जा रहा है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने कहा कि उनकी सेना किसी भी हमले का “मुंहतोड़ जवाब” देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बढ़ गया है। ईरान ने समुद्री यातायात पर नियंत्रण के लिए नया सिस्टम लागू करने का दावा किया है। इसके तहत केवल सहयोगी देशों और व्यावसायिक जहाजों को विशेष अनुमति दी जाएगी। वहीं अमेरिकी सेंटकॉम ने दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट में कई जहाजों की गतिविधियों को नियंत्रित किया गया है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते इस तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अगर हालात और बिगड़े तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।








