फार्म हाउस 52/3 प्रगति मार्ग सुल्तानपुर फॉर्म थाना फतेहपुर बेरी से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के मुताबिक यह मामला सुल्तानपुर फार्म हाउस 52/3 प्रगति मार्ग सुल्तानपुर फॉर्म थाना फतेहपुर बेरी से जुड़ा है, जहां अवैध रूप से पानी की बोरिंग किए जाने का आरोप लगाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां बोरिंग मशीनों के जरिए जमीन के अंदर पानी के बोर किए जा रहे थे, जबकि इसके लिए जो परमिशन दिखाई जा रही है उसे फर्जी बताया जा रहा है।
दक्षिणी दिल्ली के थाना फतेहपुर बेरी क्षेत्र में फर्जी बोरिंग परमिशन और अवैध तरीके से ट्यूबवेल खोदने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब इस मामले में परमिशन की कॉपी भी सामने आई है, जिसे खबर के साथ साझा किया गया है। दस्तावेज सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
PCR कॉल के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मामले को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर तीन बार शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन इसके बावजूद मौके पर चल रही बोरिंग मशीन को बंद नहीं कराया गया। आरोप है कि जिस मशीन से ट्यूबवेल की खुदाई की जा रही थी, वह एक जुगाड़ मशीन थी, जिसका कोई रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं है और न ही उससे जुड़े किसी प्रकार के वैध कागजात मौजूद बताए जा रहे हैं।
मजदूरों के पास नहीं थे सुरक्षा उपकरण
मौके पर काम कर रहे मजदूरों के पास भी किसी तरह के सुरक्षा उपकरण जैसे हेलमेट, जूते या वाटरप्रूफ कपड़े नहीं थे। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर इस दौरान कोई बड़ा हादसा हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती। बताया जा रहा है कि इस मशीन का इंश्योरेंस, पोल्यूशन सर्टिफिकेट या टैक्स से जुड़ा कोई दस्तावेज भी मौजूद नहीं है।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस, तहसीलदार अजय शर्मा (99994 20588) , तनुज भनोट ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) (9810578938 ) और SDM पीयूष कुमार 8960621358 की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। मशीन को जब्त करने या उसके कागजात की जांच तक नहीं की गई, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
एक दिन में कई ट्यूबवेल परमिशन का आरोप
सूत्रों के अनुसार यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि एक ही दिन में 25 ट्यूबवेल बोरिंग की परमिशन जारी की गई, जिसमें कथित तौर पर मोटे लेन-देन की बात भी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इन परमिशनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
पुलिस पर जांच न करने का आरोप
आरोप है कि थाना फतेहपुर बेरी के थाना अध्यक्ष ने फर्जी परमिशन की जांच कराने की दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया। जबकि नियमों के अनुसार ट्यूबवेल बोरिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीन का दिल्ली में रजिस्ट्रेशन और दिल्ली जल बोर्ड से संबंधित प्रक्रिया पूरी होना जरूरी होता है।
इस पूरे मामले में पर्यावरण से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठ रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कई मामलों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना वैध अनुमति के चल रहे बोरवेल को तुरंत बंद कर सील किया जाए। दिल्ली में अवैध बोरवेल पर कार्रवाई करते हुए उन्हें कंक्रीट से भरकर स्थायी रूप से बंद करने के आदेश भी दिए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि NGT के इतने सख्त निर्देश हैं तो फतेहपुर बेरी क्षेत्र में चल रही कथित अवैध बोरिंग पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
प्रशासन से जवाब की मांग
अब जब परमिशन की कथित कॉपी सामने आई है, तो स्थानीय लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या आरोपों की जांच कराई जाती है।








