आज रात 9 बजकर 19 मिनट पर सूर्यदेव अपनी राशि परिवर्तन करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास का समापन हो जाएगा और इसके साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाएगी। सूर्य के उत्तरायण होने से धार्मिक दृष्टि से विशेष पुण्यकाल आरंभ होगा।
14 जनवरी को षट्तिला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। शास्त्रों के अनुसार यदि संक्रांति प्रदोषकाल या रात्रि में होती है, तो उसका पुण्यकाल अगले दिन माना जाता है। इसी नियम के चलते मकर संक्रांति का प्रसिद्ध खिचड़ी पर्व 15 जनवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा।
मकर संक्रांति के अवसर पर स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है। गंगा सहित सभी नदियों, तीर्थस्थलों, कुओं और सरोवरों में स्नान करना पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन ऊनी वस्त्र, दुशाला, कंबल, जूते और धार्मिक पुस्तकों, विशेष रूप से पंचांग का दान करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
खिचड़ी पर्व देशभर में अलग-अलग स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग पवित्र तीर्थों में स्नान कर संतों और गुरुजनों को खिचड़ी, कंबल और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पर्व दान, पुण्य और सूर्य उपासना का विशेष अवसर माना जाता है।








