दिल्ली जहाँ एक तरफ प्रदूषण संकट से घिरी हुई है, वहीं दूसरी ओर वसंत कुंज साउथ, चर्च रोड, माल रोड और रंगपुरी इलाके में रात के सन्नाटे में जंगलों को बेरहमी से तबाह किया जा रहा है। वन विभाग की जमीन पर धड़ल्ले से अवैध माइनिंग, पेड़ों की कटाई, और मलबा डंपिंग का पूरा खेल बेख़ौफ़ चल रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह सब कुछ पुलिस और वन विभाग की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं है। आरोप है कि हर रात लाखों रुपये लेकर यह अवैध ऑपरेशन चलवाया जाता है।
फॉरेस्ट लैंड पर अवैध माइनिंग: पोकलैंड मशीनें पूरी रात चलती हैं
चर्च रोड—माल रोड—रंगपुरी की पूरी बेल्ट में पोकलैंड मशीनें रात भर चलती रहती हैं।
-मेट्रो की खुदाई से निकला मालवा
-निर्माण का भारी मलबा
-गहरी खुदाई से निकली मिट्टी
इन सबको सीधे वन विभाग की जमीन पर डाला जा रहा है, जिससे वन क्षेत्र की प्राकृतिक सतह पूरी तरह बदल रही है।
मलबा डालने से पहले कई जगहों पर हरे-भरे पेड़ों को काटकर ज़मीन में दबाया जाता है, ताकि ट्रकों और मशीनों को रास्ता मिल सके।
वसंत कुंज साउथ और रंगपुरी—दोनों तरफ से चल रहा है अवैध खेल
यह पूरा ऑपरेशन किसी एक लोकेशन तक सीमित नहीं।
1. वसंत कुंज साउथ—चर्च रोड—माल रोड
यह इलाक़ा रात में बिलकुल सुनसान हो जाता है। माफिया इसी मौके का फायदा उठाते हैं। ट्रक, जेसीबी, पोकलैंड मशीनें यहाँ से गुजरती हैं और पूरी रात काम जारी रहता है।
2. रंगपुरी
रंगपुरी की तरफ का रास्ता अवैध माइनिंग का दूसरा मुख्य रूट है।
यहाँ से भी ट्रक और मशीनें वन क्षेत्र में घुसती हैं और लगातार मलबा फॉरेस्ट लैंड पर डंप किया जाता है।
दोनों तरफ से होने वाली इस गतिविधि ने पूरे वसंत कुंज–रंगपुरी बेल्ट के जंगलों को खतरे में डाल दिया है।
पुलिस और वन विभाग पर गंभीर आरोप
लोग खुले तौर पर आरोप लगा रहे हैं कि यह सब पुलिस और वन विभाग की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं है। कहा जा रहा है कि हर रात लाखों रुपये लेकर यह पूरा अवैध गोरखधंधा चलाया जाता है। रात के समय बड़े ट्रक, पोकलैंड और भारी मशीनें बिना किसी रोक-टोक के आते-जाते हैं। यह सब कुछ देखने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब स्थानीय लोगों को सब पता है, वीडियो मौजूद हैं, मशीनों की आवाज़ें दूर तक सुनाई देती हैं—तो क्या अधिकारियों को यह गतिविधि दिखाई नहीं देती? या फिर आँखें जानबूझकर बंद की गई हैं?
माफियाओं का राज—जनता डरी, सिस्टम चुप
पूरी रात यह गोरखधंधा चलता है। जब दिल्ली सो रही होती है, तब जंगल खत्म हो रहे होते हैं। दिल्ली जहाँ पहले ही खतरनाक स्तर के प्रदूषण से लड़ रही है, वहाँ पेड़ों की कटाई किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकती। पेड़ शहर की प्राकृतिक ढाल हैं—वे हवा को साफ करते हैं, गर्मी कम करते हैं और प्रदूषण को कंट्रोल में रखते हैं। लेकिन वसंत कुंज साउथ और रंगपुरी के बीच खड़े इन जंगलों को माफिया द्वारा खत्म किया जा रहा है और ऐसा लगता है कि कोई उनकी रक्षा करने वाला नहीं है। रात होते ही दिल्ली सो जाती है और उसके साथ उसकी हरियाली भी सो जाती है—या कहें कि सोते-सोते खत्म कर दी जाती है।
मलबे से भरे ट्रकों का लगातार आना-जाना, मशीनों का महीनों तक चलना और पेड़ों का एक-एक करके गायब होना अब आम बात बन चुकी है। यह सिर्फ जमीन पर अतिक्रमण नहीं, बल्कि दिल्ली के भविष्य पर हमला है। अगर अभी भी कार्रवाई नहीं हुई, तो जल्द ही वसंत कुंज साउथ–रंगपुरी बेल्ट के जंगल इतिहास बन जाएंगे। दिल्ली की हरियाली SOS भेज रही है—लेकिन सवाल है कि क्या कोई उसे सुनने वाला बचा है?







