वसंत कुंज साउथ में वन भूमि पर अवैध माइनिंग और पेड़ कटान, रात के अंधेरे में चल रहा पेड़ों की कटाई का खेल

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दिल्ली जहां एक ओर खतरनाक स्तर के प्रदूषण से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर वसंत कुंज साउथ क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों की कटाई और अवैध माइनिंग का सिलसिला तेजी से बढ़ रहा है। थाना वसंत कुंज साउथ के अंतर्गत चर्च रोड–माल रोड, वसंत कुंज के पास वन विभाग की जमीन पर खुलेआम भारी मशीनरी चलाकर जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह पूरा काम नियोजित तरीके से रात के अंधेरे में किया जा रहा है—जब दिल्ली गहरी नींद में होती है, तब माफिया सक्रिय हो जाते हैं और वन क्षेत्र को धीरे-धीरे तबाह कर रहे हैं।

वन विभाग की जमीन पर अवैध माइनिंग का खुला खेल

सूत्रों के मुताबिक, इस इलाके में पोकलैंड मशीनों से लगातार माइनिंग की जा रही है। मेट्रो की खुदाई से निकला मलवा और मिट्टी व निर्माण का मलबा, इन सबको सीधे फॉरेस्ट लैंड पर डाला जा रहा है।

इस प्रक्रिया में न केवल जंगल की जमीन को दफन किया जा रहा है बल्कि बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों को काटकर मिट्टी के नीचे दबाया जा रहा है। वीडियो और तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि पेड़ों को जड़ों समेत उखाड़कर ढेरों की तरह दबा दिया गया है।

 

जो दिल्ली को बचा रहे थे वही निशाने पर

दिल्ली की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। AQI संकट रिकॉर्ड तोड़ रहा है। ऐसे समय में जब एक पेड़ भी लाखों लोगों को ऑक्सीजन दे सकता है, उस प्राकृतिक रक्षा कवच को ही नष्ट किया जा रहा है।

-पेड़ों को काटा जा रहा है
-दबाया जा रहा है
-फॉरेस्ट की प्राकृतिक पारिस्थितिकी बिगड़ रही है
यह न सिर्फ पर्यावरण कानून का स्पष्ट उल्लंघन है बल्कि दिल्ली की आने वाली पीढ़ियों के साथ किया जा रहा एक बड़ा अपराध है।

पैसे लेकर कार्रवाई से बचने के आरोप, पुलिस–वन विभाग की भूमिका पर सवाल

स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि यह अवैध कार्य बिना सिस्टम की मिलीभगत के संभव नहीं है।
मौके पर मौजूद लोगों का दावा है:
-प्रति रात लाखों रुपये की वसूली
-पुलिस और वन विभाग के कुछ अधिकारियों की मौन सहमति
-अवैध गतिविधियों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है
-रात में बड़ी-बड़ी मशीनें चलना, दर्जनों ट्रक मलबा भरकर फॉरेस्ट लैंड में डालना—यह सब बिना प्रोटेक्शन और सपोर्ट के संभव नहीं होता।

रात में चलता ‘गोरखधंधा’, दिन में किसी को भनक तक नहीं

पूरा ऑपरेशन रात में संचालित होता है।जब सड़कें सुनसान होती हैं और अधिकारी ड्यूटी से बाहर, तभी हाइवे से मलबा भरकर ट्रक लाई जाती हैं।फॉरेस्ट लैंड की ढलान समतल की जाती है। पेड़ों को गिराकर मिट्टी से ढका जाता है। मशीनें कई घंटे लगातार चलती हैं

इस पूरे मामले ने लोगों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। वीडियो और फोटो सबूत यह दिखाते हैं कि जंगल को नुकसान पहुंचाना कोई छोटी या तत्कालिक समस्या नहीं, बल्कि एक सिस्टमेटिक पर्यावरण विनाश है।

स्थानीय निवासियों की मांग है:

तत्काल जांच

रात में चल रही मशीनरी पर रोक

वन भूमि पर मलबा डालने वाले माफिया पर कार्रवाई

भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों के खिलाफ FIR

काटे गए पेड़ों की भरपाई और पुनर्वनीकरण

वसंत कुंज साउथ की यह घटना सिर्फ पेड़ों की कटाई की कहानी नहीं है-यह दिल्ली के भविष्य पर हमला है। जब राजधानी प्रदूषण से कराह रही हो, तब हरे पेड़ों की हत्या किसी भी लिहाज से स्वीकार्य नहीं है। सिस्टम की लापरवाही, माफियाओं की हिम्मत और रात के अंधेरे में चल रहे इस अवैध धंधे को रोकना बेहद जरूरी है।

अगर अब भी कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र न सिर्फ पेड़ों से खाली होगा, बल्कि दिल्ली का पर्यावरण और अधिक खतरनाक स्थिति में पहुंच जाएगा।

 

Kinni Times
Author: Kinni Times

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