नई दिल्ली/अहमदाबाद : देश की न्यायपालिका को लेकर हाल के दिनों में हैरान करने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में कुछ दिन पहले एक वकील ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर जूता फेंककर सनसनी फैला दी थी, और अब गुजरात के अहमदाबाद में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यहां मंगलवार को एक व्यक्ति ने कोर्ट का फैसला सुनते ही गुस्से में जज पर जूते फेंक दिए।
यह मामला अहमदाबाद की सिविल एवं सत्र अदालत का है, जहां अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश एम.पी. पुरोहित 1997 के एक पुराने मारपीट मामले का फैसला सुना रहे थे। कोर्ट ने चार आरोपियों को बरी कर दिया। फैसला सुनते ही शिकायतकर्ता भड़क गया और उसने दोनों जूते निकालकर जज की ओर फेंक दिए। अचानक हुई इस घटना से कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
बताया जा रहा है कि यह विवाद 1997 में गोमतीपुर इलाके में हुए एक क्रिकेट मैच से जुड़ा था, जिसमें शिकायतकर्ता के पिता पर हमला हुआ था। 2017 में अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था, और अब सत्र न्यायालय ने उस फैसले को बरकरार रखा। इससे नाराज व्यक्ति ने कोर्ट में हंगामा शुरू कर दिया।
सरकारी वकील सुधीर ब्रह्मभट्ट के अनुसार, आरोपी व्यक्ति ने फैसले के बाद जज को गालियां दीं और पुलिस द्वारा रोकने पर और अधिक उग्र हो गया। हालांकि, जज एम.पी. पुरोहित ने किसी भी तरह की शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया और पुलिस से कहा कि उस व्यक्ति पर कोई कार्रवाई न की जाए।
इस घटना के बाद गुजरात न्यायिक सेवा संघ ने अदालतों में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष एस.जी. डोडिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हुए जूता फेंकने की घटना के कुछ ही दिनों बाद यह दूसरी बड़ी घटना है, जो न्यायिक व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। संघ ने अदालतों, न्यायाधीशों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए तत्काल सख्त कदम उठाने की अपील की है।
मुख्य बिंदु:
अहमदाबाद कोर्ट में व्यक्ति ने जज पर जूते फेंके
1997 के मारपीट केस में चार आरोपी बरी
फैसले से नाराज होकर कोर्ट में हंगामा
जज ने व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज करने से किया इनकार
न्यायिक सेवा संघ ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग की




