दक्षिणी गाजा में राहत सामग्री लेने निकले 32 फिलिस्तीनी नागरिकों की जान इजरायली हमले में चली गई। यह हमला उस वक्त हुआ जब लोग खाने की सामग्री के लिए अमेरिका-इजरायल समर्थित गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन (GHF) के वितरण केंद्रों की ओर बढ़ रहे थे। चश्मदीदों और अस्पताल प्रशासन ने इस भीषण त्रासदी की पुष्टि की है।
सहायता केंद्र बना मौत का मंजर
यह घटना गाजा के तीएना और रफह इलाकों में हुई, जहां GHF के वैकल्पिक सहायता वितरण अभियान के तहत खाना वितरित किया जा रहा था। इस मिशन को अमेरिका और इजरायल का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने दावा किया था कि संयुक्त राष्ट्र की पारंपरिक सहायता हमास के हाथों में चली जाती है — हालांकि UN ने इस दावे को खारिज किया है।
इजरायली सेना का पक्ष और प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती
इजरायली सेना का कहना है कि उसने भीड़ को नियंत्रित करने और चेतावनी देने के लिए गोली चलाई, लेकिन स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सैनिकों ने भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग की।
महमूद मोकेइमर, जो सहायता केंद्र की ओर जा रहे थे, ने बताया:
“पहले चेतावनी में गोलियां चलीं, फिर भीड़ पर सीधा फायर हुआ।”
अस्पतालों में चीख-पुकार
खान यूनिस के नासिर अस्पताल में 25 शव और दर्जनों घायल पहुंचाए गए, वहीं रफह के शाकौश इलाके में एक अन्य जीएचएफ केंद्र के पास 7 और लोगों की मौत हुई। मृतकों में महिलाएं और बुज़ुर्ग भी शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और बढ़ता संकट
इस हमले की अंतरराष्ट्रीय समुदायों द्वारा तीखी निंदा की गई है। सभी ने तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
गाजा पहले ही भूख, पानी और दवाइयों की भारी किल्लत से जूझ रहा है और यह हमला मानवीय संकट को और गहरा कर गया है।








