दिल्ली के असोला गांव में काली मंदिर पर तोड़फोड़: वन विभाग के मुस्लिम अधिकारी पर गंभीर आरोप

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 दिल्ली के असोला गांव में काली मंदिर पर तोड़फोड़: वन विभाग के मुस्लिम अधिकारी पर गंभीर आरोप

नई दिल्ली, 12 जून 2025 — दक्षिणी दिल्ली के असोला गांव में स्थित एक प्राचीन मां काली मंदिर में कथित रूप से वन विभाग के एक अधिकारी द्वारा की गई तोड़फोड़ ने स्थानीय हिंदू समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। यह मंदिर वर्ष 1980 में खसरा नंबर 1668 गांव असोला पर बना था और वर्षों से स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है।

शिकायतकर्ता किरण सिंह पुत्र गिरधारी लाल ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, मुख्यमंत्री दिल्ली, और अन्य उच्च अधिकारियों को लिखित रूप में शिकायत भेजकर बताया कि ताजुद्दीन खान, जो कि वन विभाग में डिप्टी रेंजर के पद पर कार्यरत हैं, ने मंदिर की पवित्रता भंग की और वहां पूजा-पाठ के कार्य को रोका।

क्या है मामला?

शिकायत के अनुसार, दिनांक 29 और 30 मई 2025 को मंदिर परिसर की सफाई और मरम्मत का कार्य चल रहा था, जिसकी जानकारी वन विभाग को पहले ही दी गई थी। आरोप है कि ताजुद्दीन खान ने मंदिर के पुजारी से ₹50,000 की रिश्वत मांगी और जब मांग पूरी नहीं हुई, तो उन्होंने बिना किसी नोटिस, बिना पुलिस बल और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के मंदिर में घुसकर तोड़फोड़ की।

आज 12 जून 2025 को सुबह करीब 11:00 बजे ताजुद्दीन खान ने अपने कर्मचारियों को जबरन मंदिर में प्रवेश किया और जूते पहनकर मंदिर परिसर में घुसकर मंदिर की पवित्रता को भंग किया
पूजा स्थल को नुकसान पहुँचाया। पुलिस कंट्रोल रूम 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी, और मौके पर शिकायत दर्ज कराई गई। जो व्हाट्सएप तथा ईमेल के द्वारा भेजी गई

धार्मिक सौहार्द पर सवाल

इस घटना में सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस अधिकारी पर आरोप लगे हैं, वे एक मुस्लिम समुदाय से आते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह केवल कानूनी उल्लंघन नहीं बल्कि धार्मिक असहिष्णुता का भी प्रतीक है।

यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब देश में धार्मिक सद्भाव और सांप्रदायिक एकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। यदि सरकार द्वारा ऐसे मामलों में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की जाती, तो इससे सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँच सकता है।

मांगें और कार्रवाई

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि दोषी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए और उसे तत्काल निलंबित किया जाए। इसके साथ बाकी और मंदिरों की तरह जैसे गुरुजी आश्रम जो पूरा फॉरेस्ट लैंड पर बना हुआ है मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

???? यह खबर यह भी सवाल खड़े करती है कि क्या प्रशासनिक अधिकारी धर्मनिरपेक्षता की मर्यादा का पालन कर रहे हैं? जब अधिकारी स्वयं धार्मिक भावना को आहत करने वाले कार्य करें, तो समाज में आक्रोश उत्पन्न होना स्वाभाविक है।

हलका पटवारी असोला गांव एसडीम ऑफिस साकेत शिकायतकर्ता को एक रिपोर्ट पेश करी है जिसमें खसरा नंबर 1668 पर मंदिर रेवेन्यू रिकॉर्ड पर चढ़ा हो बताया गया है तथा प्राचीन मंदिर 1980 का बनाया बताया है परंतु वन विभाग है जो मानता नहीं ?

 

 

Kinni Times
Author: Kinni Times

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