नई दिल्ली: सोशल मीडिया के जरिए वकीलों द्वारा क्लाइंट्स को आकर्षित करने के बढ़ते चलन पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने देश की सभी स्टेट बार काउंसिल्स से जवाब मांगा है।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ के सामने आया। याचिकाकर्ता अनिल पांडे का कहना है कि कई अधिवक्ता Instagram, YouTube और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील्स और वीडियो बनाकर अप्रत्यक्ष रूप से अपने लिए क्लाइंट्स जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।
याचिका में कहा गया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम (Rule 36) के अनुसार कोई भी अधिवक्ता अपने पेशे के प्रचार या क्लाइंट्स को आकर्षित करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विज्ञापन नहीं कर सकता। ऐसे में सोशल मीडिया पर बढ़ती प्रचार गतिविधियां नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकती हैं।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि सोशल मीडिया के माध्यम से क्लाइंट्स को आकर्षित करने वाले वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही अदालत परिसरों में वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रचारात्मक कंटेंट बनाने पर रोक लगाने तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वकीलों के आचरण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए जाएं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सभी स्टेट बार काउंसिल्स से इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अब इस मामले में आने वाला फैसला यह तय कर सकता है कि सोशल मीडिया पर कानूनी जानकारी साझा करना और पेशेवर प्रचार करना—इन दोनों के बीच सीमा रेखा कहां खींची जाएगी।
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