नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा अनशन समाप्त किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना है और इस मुद्दे पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव या समझौता नहीं होना चाहिए।
दलवई ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग आंदोलन का प्रमुख मुद्दा है। उनके अनुसार, जब तक इस मांग पर कोई ठोस फैसला नहीं होता, तब तक केवल बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकालना मुश्किल होगा।
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में समाजसेवी अन्ना हजारे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान भी सरकार के मंत्री उनसे बातचीत करने पहुंचे थे, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं। इसी संदर्भ में उन्होंने सोनम वांगचुक को सलाह दी कि वे किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव में आने से बचें और अपने आंदोलन की निष्पक्षता बनाए रखें।
आंदोलन दबाने के प्रयास का आरोप
हुसैन दलवई ने आरोप लगाया कि देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती और बल प्रयोग जैसी घटनाएं चिंता का विषय हैं। उनका मानना है कि सरकार को आंदोलनकारियों से संवाद बढ़ाना चाहिए और उनकी प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सोनिया गांधी के बयान का किया समर्थन
कांग्रेस नेता ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के शिक्षा व्यवस्था पर दिए गए हालिया बयान का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों में परीक्षा प्रणाली को लेकर असंतोष बढ़ रहा है और उन्हें लग रहा है कि उनकी मेहनत के साथ न्याय नहीं हो रहा। उनके मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक करने पर क्या बोले?
दिल्ली पुलिस द्वारा सैकड़ों पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक किए जाने के सवाल पर दलवई ने कहा कि इस तरह के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई करना सरकार का अधिकार है और सुरक्षा से जुड़े मामलों में संबंधित एजेंसियां उचित निर्णय लेंगी।








