दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके के सैदुलाजाब में पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने जूनियर इंजीनियर अमन जैन और असिस्टेंट इंजीनियर सुदेश सिंह चौहान को सस्पेंड कर दिया है, लेकिन इलाके में लगातार हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर बड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरे इलाके में अवैध निर्माण और रिहायशी मकानों में धड़ल्ले से कमर्शियल गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों ने एमसीडी, पुलिस और डीडीए की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।

हादसे में रवि, कपिल, नलिन रे, आलोक, पार्वती और एकता समेत छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं मलबे से 10 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें से आठ घायल बताए गए हैं। घायलों का इलाज एम्स में चल रहा है।
पुलिस ने भवन मालिक कर्मवीर जेलदार, बिल्डर मनीष खत्री और ठेकेदार सिराज के खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। तीनों आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
घटना के बाद से एनडीआरएफ, दमकल विभाग और दिल्ली पुलिस की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि शुरुआती घंटों में बचाव कार्य धीमा रहा और बड़ी क्रेन देर से पहुंची, जिसके कारण कई लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
मृतक पार्वती की बेटी नीलम ने बताया कि हादसे के कई घंटों बाद तक उनकी मां मलबे के नीचे से मदद की गुहार लगाती रहीं, लेकिन पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण समय पर राहत नहीं पहुंच सकी।
विशेषज्ञों के अनुसार इमारत के पिलर अधिक भार सहन नहीं कर पाए, जिसके चलते पूरी बिल्डिंग भरभराकर गिर गई। बताया जा रहा है कि पुरानी इमारत पर लगातार नई मंजिलें बनाई जा रही थीं और पिछले डेढ़ महीने से एक और फ्लोर का निर्माण चल रहा था।
हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। वहीं इलाके में अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है
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