कॉमेडी के लिए मशहूर अभिनेता राजपाल यादव एक पुराने वित्तीय मामले में फिर सुर्खियों में हैं। चेक बाउंस से जुड़े केस में उन्होंने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया है। यह विवाद करीब एक दशक पुराना है, जिसकी जड़ें उनकी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण से जुड़ी हैं।
बताया जाता है कि साल 2010 में फिल्म बनाने के लिए उन्होंने दिल्ली की एक कंपनी से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर सफल न होने के बाद भुगतान में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया। शिकायतकर्ता को दिए गए कई चेक बाउंस होने पर 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी। बाद में सत्र न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।
उच्च न्यायालय में राहत की कोशिश के दौरान 2024 में सजा पर अस्थायी रोक लगी, साथ ही बकाया रकम चुकाने का निर्देश दिया गया। अदालत के अनुसार कुल देनदारी लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। राजपाल यादव ने 2025 में कुछ किश्तों में रकम जमा भी की, लेकिन समयसीमा के भीतर पूरा भुगतान नहीं हो सका।
फरवरी 2026 की सुनवाई में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आत्मसमर्पण का आदेश दिया। अतिरिक्त समय देने की मांग खारिज कर दी गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए समान है, चाहे व्यक्ति कितना भी प्रसिद्ध क्यों न हो।
इसके बाद 5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया, जहां वे छह महीने की सजा काटेंगे। अदालत ने जमा कराई गई राशि शिकायतकर्ता को सौंपने की प्रक्रिया भी पूरी कर दी है।








