मुस्लिम देशों को एकजुट करने निकला ईरान, NATO जैसा गठबंधन बनाने का प्रस्ताव

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ईरान-अमेरिका के बीच जारी शांति वार्ता और कूटनीतिक प्रयासों के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान मंगलवार को एक दिवसीय दौरे पर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे। वहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद उन्होंने मुस्लिम जगत के लिए यह बड़ा संदेश जारी किया। ईरानी राष्ट्रपति की इस पहल को मध्य-पूर्व और वैश्विक स्तर पर अमेरिका-इजरायल के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इस रणनीतिक गठबंधन का मूल आधार बिल्कुल पश्चिमी देशों के संगठन नाटो (NATO) जैसा ही होगा। नाटो का एक नियम है- ‘एक देश पर हमला यानी सभी सदस्य देशों पर हमला।’ इसी तर्ज पर ईरान चाहता है कि मुस्लिम देश भी एक ऐसा संयुक्त मोर्चा तैयार करें, जिससे अगर भविष्य में किसी भी मुस्लिम देश पर पश्चिमी ताकतें या इजरायल हमला करता है, तो पूरा संगठन मिलकर उसका सैन्य जवाब दे।

पहले से चल रही है चर्चा
अंतरराष्ट्रीय रणनीतिकारों के मुताबिक, मिस्र (Egypt), तुर्की (Turkey), सऊदी अरब (Saudi Arabia) और पाकिस्तान जैसे बड़े और सैन्य रूप से मजबूत मुस्लिम देश पहले से ही ‘इस्लामिक नाटो’ की संभावनाओं और इसकी रूपरेखा पर पर्दे के पीछे चर्चा कर रहे हैं। अब ईरान ने खुलकर सामने आकर इसके लिए मजबूत पहल कर दी है। गौरतलब है कि इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद से मध्य-पूर्व में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। हालांकि, स्विट्जरलैंड और पाकिस्तान की मध्यस्थता में ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (Islamabad MoU) के तहत शांति वार्ता का दौर भी चल रहा है, लेकिन ईरान भविष्य की सुरक्षा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।

 

Kinni Times
Author: Kinni Times