लोकसभा में बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान जोरदार हंगामा देखने को मिला। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्धारित जवाब भी नहीं हो सका और सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष प्रधानमंत्री को बोलने नहीं देना चाहता और यह उसकी हताशा को दर्शाता है। वहीं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि वे एक ऐसी किताब का हवाला दे रहे थे जो अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है, जबकि उन्होंने प्रकाशित स्रोत का संदर्भ दिया।
बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत सुबह से ही हो गई थी। विपक्षी सांसद चीन के साथ 2020 के गतिरोध और पूर्व थलसेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा के संदर्भ को लेकर विरोध जता रहे थे। शोर-शराबे के बीच कार्यवाही कई बार रोकी गई।
शाम करीब 5 बजे जब सदन दोबारा शुरू हुआ और प्रधानमंत्री के बोलने की संभावना बनी, तब कुछ विपक्षी महिला सांसद सत्तापक्ष की सीटों के सामने आकर प्रदर्शन करने लगीं। उनके हाथ में ‘Do What Is Right’ लिखा बैनर था। इन सांसदों ने प्रधानमंत्री की सीट के सामने भी नारेबाजी की। उनका विरोध एक दिन पहले निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसदों के मुद्दे पर था।
स्थिति को देखते हुए उस समय पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने कार्यवाही स्थगित कर दी। बाद में मंत्रियों के हस्तक्षेप के बाद महिला सांसद अपनी सीटों पर लौटीं, लेकिन तब तक सदन का कामकाज बाधित हो चुका था।








