दक्षिण दिल्ली के भाटी गांव स्थित थाना मैदानगढ़ी क्षेत्र में वन विभाग की सरकारी जमीन पर एक बार फिर कथित अवैध निर्माण का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पहले जिस निर्माण को वन विभाग ने ध्वस्त कर दिया था, उसी स्थान पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर इलाके में चिंता और नाराज़गी का माहौल है।
जानकारी के अनुसार मामला असोला गांव के खसरा नंबर 1498, फॉर्म नंबर-18 (कृष्णा फार्म, गुरुजी आश्रम के पीछे) से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह भूमि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है। उनका कहना है कि पहले यहां बने अवैध निर्माण को वन विभाग ने हटाया था और मौके पर विभाग का बोर्ड भी लगाया गया था, लेकिन अब फिर से चारदीवारी और अन्य निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
NGT के आदेश का भी हवाला
शिकायतकर्ताओं के अनुसार यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में लंबित OA No. 58/2013 (सोनिया घोष बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) से जुड़ा है। उनका दावा है कि 14 मई 2026 को जारी आदेश में संबंधित जमीन पर निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन को भी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया था।
हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन निर्देशों के बावजूद मौके पर निर्माण कार्य फिर से शुरू हो गया है।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
मामले में भाटी चौकी में तैनात एक पुलिस अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई बार पुलिस हेल्पलाइन 112 पर शिकायत देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी दावा किया है कि शिकायत करने वालों को कथित रूप से दबाव और झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी गईं।
इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पुलिस अधिकारी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
CBI जांच की मांग
स्थानीय लोगों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका, वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि यदि जमीन वन विभाग की है तो वहां दोबारा निर्माण कैसे शुरू हुआ।
वन भूमि पर अतिक्रमण को बताया गंभीर मुद्दा
पर्यावरण से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि वन विभाग की जमीन पर वास्तव में अवैध निर्माण हो रहा है तो यह केवल सरकारी संपत्ति पर कब्जे का मामला नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा गंभीर विषय भी है। दक्षिण दिल्ली का भाटी क्षेत्र पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण भविष्य में पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो निर्माण कार्य तत्काल रुकवाया जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए तथा सरकारी भूमि को दोबारा अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
ASI मनजीत पर लगे आरोपों पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में भाटी चौकी में तैनात ASI मनजीत पर भी शिकायतकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि वन विभाग की जमीन पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण को प्रशासनिक संरक्षण मिलने के कारण ही दोबारा निर्माण संभव हो पाया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने कई बार पुलिस हेल्पलाइन 112 और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन इसके बावजूद मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी गई। इसके अलावा उन्होंने दावा किया है कि ASI मनजीत पिछले लगभग चार वर्षों से भाटी चौकी में तैनात हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बीच में तबादले के आदेश जारी होने के बावजूद उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि यदि तबादले के आदेश जारी हुए थे तो उन्हें लागू क्यों नहीं किया गया।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि यदि लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया कोई तथ्य मिलता है, तो संबंधित पुलिस अधिकारी की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और कथित संपत्तियों की सक्षम एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ASI मनजीत के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की अभी किसी सक्षम जांच एजेंसी या अदालत द्वारा पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पुलिस अधिकारी की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ताओं और स्थानीय लोगों के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभागों और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।








