क्या आपको भी थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाने का मन करता है, जबकि आपने कुछ समय पहले ही खाना खाया हो? अगर ऐसा अक्सर तनाव, चिंता या मानसिक दबाव के दौरान होता है, तो यह स्ट्रेस ईटिंग (Stress Eating) या इमोशनल ईटिंग (Emotional Eating) का संकेत हो सकता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑफिस का दबाव, पढ़ाई, नौकरी की चिंता, आर्थिक तनाव और निजी जिम्मेदारियां लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। कई लोग ऐसे तनाव से राहत पाने के लिए बार-बार खाना शुरू कर देते हैं। शुरुआत में यह आदत सामान्य लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करने से वजन बढ़ना, मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
क्यों होती है स्ट्रेस ईटिंग?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तनाव के समय शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन मीठे, तले-भुने और अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ खाने की इच्छा बढ़ा सकता है। यही वजह है कि तनाव में कई लोगों का मन हेल्दी भोजन की बजाय जंक फूड या मिठाइयों की ओर अधिक जाता है।
स्ट्रेस ईटिंग के प्रमुख संकेत
- खाना खाने के कुछ समय बाद भी बार-बार भूख महसूस होना।
- तनाव या चिंता होते ही कुछ खाने की तीव्र इच्छा होना।
- फल और सलाद की बजाय मिठाई, चिप्स, कुकीज या तली-भुनी चीजें खाने का मन करना।
- उदासी, गुस्सा या मानसिक दबाव में राहत पाने के लिए भोजन का सहारा लेना।
कैसे करें बचाव?
यदि आपको लगता है कि आपकी भूख तनाव की वजह से बढ़ रही है, तो सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि वास्तव में आपको भूख लगी है या यह केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया है।
बचाव के लिए ये उपाय अपनाए जा सकते हैं:
- खाने से पहले कुछ मिनट रुककर अपनी भूख को समझें।
- जंक फूड की जगह फल, दही, मेवे या भुने चने जैसे हेल्दी स्नैक्स चुनें।
- उन परिस्थितियों को पहचानें, जिनमें आपको बार-बार खाने की इच्छा होती है।
- रोजाना पर्याप्त और अच्छी नींद लें, क्योंकि अच्छी नींद तनाव कम करने में मदद करती है।
- यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते स्ट्रेस ईटिंग की आदत पर नियंत्रण कर लिया जाए तो मोटापा और उससे जुड़ी कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। इसलिए केवल भूख नहीं, बल्कि उसके पीछे की वजह को समझना भी उतना ही जरूरी है।
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