दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में कथित 650 करोड़ रुपये के दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले की जांच तेज हो गई है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व महानिदेशक (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल और डिप्टी कंट्रोलर (फाइनेंस) नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार किया है।
इससे पहले इसी मामले में केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) के पूर्व प्रमुख और हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा को 19 जून को गिरफ्तार किया जा चुका है। लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बाद अब जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।
गिरफ्तार दोनों अधिकारियों को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर भेजा गया। जांच एजेंसियां टेंडर मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति, भुगतान प्रक्रिया और खरीद संबंधी फैसलों की विस्तार से जांच कर रही हैं।
जांच के घेरे में अब 100 से अधिक डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताए जा रहे हैं। कई सरकारी अस्पतालों से रिकॉर्ड और दस्तावेज जुटाए गए हैं, जबकि संबंधित अधिकारियों से पूछताछ जारी है। विभागीय स्तर पर पांच फार्मासिस्ट और दो अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि अस्पतालों की ओर से दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की मांग वास्तविक जरूरत के अनुसार भेजी गई थी या खरीद को प्रभावित करने के लिए मांग को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। इसके लिए अस्पतालों के मांग पत्र, उपलब्ध स्टॉक और वास्तविक खपत का मिलान किया जा रहा है।
मामले की शुरुआत सतर्कता निदेशालय की शिकायत के बाद हुई थी। इसके आधार पर ACB ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। जांच के दौरान केंद्रीय खरीद एजेंसी के कार्यालय से कई दस्तावेज जब्त किए गए, हालांकि कुछ महत्वपूर्ण टेंडरों से जुड़ी फाइलें कथित तौर पर नहीं मिलीं।
इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी ACB की एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू कर दी है। ईडी अब सरकारी भुगतान की मनी ट्रेल खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धन किन कंपनियों और अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचा।
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