सूरजकुंड मेले में झूला टूटने से हुए हादसे के बाद अब जांच रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में आ गई है। नियमों के मुताबिक, किसी भी मनोरंजन झूले को चलाने से पहले विभिन्न विभागों के अधिकारियों की एक इंस्पेक्शन कमेटी बनती है, जो तकनीकी जांच के बाद नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करती है। इतना ही नहीं, दावा यह भी है कि यह कमेटी रोजाना झूलों का निरीक्षण करती है।
लेकिन हादसे वाले दिन की इंस्पेक्शन रिपोर्ट को लेकर स्थिति साफ नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यही है—शनिवार सुबह जब झूले का निरीक्षण हुआ, तो रिपोर्ट में क्या दर्ज था? अगर कोई तकनीकी खामी थी तो झूला चलाने की अनुमति क्यों दी गई? और यदि रिपोर्ट में सब कुछ ठीक बताया गया था, तो हादसा कैसे हो गया? इन सवालों पर अधिकारी सीधे जवाब देने से बचते दिख रहे हैं।
इस बीच, हादसे के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मेले और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा मानकों के सख्त पालन के निर्देश दिए हैं। सभी झूलों और उपकरणों के टेक्निकल इंस्पेक्शन, फिटनेस सर्टिफिकेशन और ऑपरेशन सिस्टम की व्यापक समीक्षा कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
जांच के लिए एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ADC) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय नई कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी हादसे के कारणों की जांच के साथ-साथ उस पूर्व इंस्पेक्शन कमेटी की रिपोर्ट की भी समीक्षा करेगी, जिसने रोजाना निरीक्षण का दावा किया था।
नई कमेटी में DCP NIT मकसूद अहमद, JC बोस YMCA यूनिवर्सिटी के मैकेनिकल विशेषज्ञ अरविंद गुप्ता, सिंचाई विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हितेश कुमार और HSVP के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अश्विनी गौर शामिल हैं। टीम अलग-अलग तकनीकी पहलुओं से जांच में जुट गई है।
झूले लगाने के नियम क्या कहते हैं?
मनोरंजन राइड लगाने से पहले साइट, एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स की जांच अनिवार्य है। मैकेनिकल फिटनेस सर्टिफिकेट, फायर NOC, इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्शन, थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस, सुरक्षा निर्देशों का स्पष्ट प्रदर्शन, फर्स्ट-एड और इमरजेंसी स्टॉप सिस्टम—ये सभी अनिवार्य शर्तें हैं।
इंस्पेक्शन कमेटी में PWD के मैकेनिकल व इलेक्ट्रिकल अधिकारी, फायर ऑफिसर, इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर, HSVP और हरियाणा टूरिज्म के इंजीनियर, तथा तकनीकी संस्थान के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
अब सबसे अहम सवाल यही है कि जब नियम इतने सख्त हैं, तो NOC और दैनिक निरीक्षण के बावजूद यह हादसा कैसे हो गया। नई जांच रिपोर्ट से ही यह साफ हो पाएगा कि चूक तकनीकी थी, मानवीय थी या कागजी।








