नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर पहाड़ी स्थित अंबेडकर कॉलोनी (खसरा नंबर 289) कम्यूनिटी सेंटर के पास एक पुराने पीपल के पेड़ को काटे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब 80 वर्ष पुराना पीपल का पेड़, जिसकी वर्षों से धार्मिक आस्था के साथ पूजा की जाती रही है, उसे काटने की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पेड़ को कथित रूप से भू-माफियाओं के हित में हटाया जा रहा है। उनका यह भी दावा है कि इस मामले में वन विभाग और महरौली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित विभागों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पीपल का पेड़ केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक आस्था और पर्यावरणीय विरासत का प्रतीक है। उनका आरोप है कि यदि बिना वैधानिक अनुमति के पेड़ काटा जाता है तो इससे पर्यावरण संरक्षण कानूनों और वृक्ष संरक्षण नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
निवासियों ने मांग की है कि पेड़ काटने की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए और यह सार्वजनिक किया जाए कि क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकारी से विधिवत अनुमति ली गई है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल यह है कि यदि यह पेड़ वास्तव में संरक्षित या धार्मिक महत्व का है, तो इसे हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी और क्या इसके लिए सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है?








