गोरखपुर: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर में संगठन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर गोरखपुर जिले और महानगर की पूरी पार्टी इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
पार्टी की ओर से जारी निर्देश में जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष समेत जिला एवं महानगर कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों को हटा दिया गया है। इसके साथ ही फ्रंटल संगठनों और राज्य-प्रदेश कार्यकारिणी में गोरखपुर से जुड़े पदाधिकारियों की इकाइयां भी भंग कर दी गई हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विवाद के बाद कार्रवाई
पार्टी के इस फैसले को एक दिन पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आए विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक प्रेस वार्ता के दौरान गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से सपा की ओर से चुनाव लड़ने का दावा कर रहे अंशुमान सिंह और पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के बीच किसी मुद्दे को लेकर कहासुनी हो गई।
देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और वहां मौजूद लोगों के सामने मामला हाथापाई तक पहुंच गया। आरोप है कि इसी दौरान अंशुमान सिंह के बेटे ने पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी को थप्पड़ मार दिया।
मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला और विवाद को आगे बढ़ने से रोका। घटना की जानकारी बाद में पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाई गई।
अंशुमान सिंह को पार्टी से किया गया निष्कासित
विवाद की जानकारी मिलने के बाद पार्टी ने तत्काल कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि घटना के कुछ ही समय बाद अंशुमान सिंह को समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
इसके अगले दिन पार्टी नेतृत्व की ओर से गोरखपुर संगठन की सभी इकाइयों को भंग करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले के बाद जिला और महानगर संगठन में बड़े बदलाव की संभावना बढ़ गई है।
जिला अध्यक्ष से लेकर फ्रंटल संगठन तक भंग
सपा के निर्देश के अनुसार कार्रवाई केवल जिला संगठन तक सीमित नहीं रही। जिला अध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष और दोनों कार्यकारिणियों के अलावा पार्टी के विभिन्न फ्रंटल संगठनों तथा राज्य और प्रदेश कार्यकारिणी में गोरखपुर से जुड़े पदाधिकारियों को भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
पार्टी के इस कदम को संगठन में अनुशासन बनाए रखने और स्थानीय स्तर पर चल रहे विवादों पर नियंत्रण के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
चुनाव से पहले संगठन को लेकर अहम फैसला
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में सपा का गोरखपुर की पूरी जिला और महानगर इकाई को भंग करना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक अहम केंद्र है। ऐसे में पार्टी अब यहां नए सिरे से संगठनात्मक जिम्मेदारियां तय कर सकती है। नए जिला और महानगर अध्यक्षों के साथ नई कार्यकारिणी के गठन पर भी जल्द फैसला होने की संभावना है।
विवाद के बाद पार्टी नेतृत्व का सख्त संदेश
गोरखपुर की घटना और उसके बाद संगठन को भंग करने के फैसले से पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर नेतृत्व के रुख का संकेत मिलता है। पहले संबंधित नेता पर कार्रवाई और फिर पूरी संगठनात्मक इकाई को भंग किए जाने से स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि समाजवादी पार्टी गोरखपुर में नई जिम्मेदारियां किसे सौंपती है और आगामी चुनाव से पहले नए संगठन को कितनी जल्दी तैयार किया जाता है। फिलहाल पार्टी के इस फैसले ने गोरखपुर की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।








