राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी (विशेष जांच दल) रिपोर्ट में कई ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह चोरी किसी एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि पूरी योजना के साथ लंबे समय तक अंजाम दी जा रही थी।
जांच में सामने आया है कि आरोपित मंदिर के गणना कक्ष में समूह बनाकर काम करते थे। चोरी के दौरान एक कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों की ओट बनता था, जबकि दूसरा नोटों की गड्डियां अपनी जेब, कपड़ों और यहां तक कि जूतों में छिपा लेता था। यही तरीका बार-बार अपनाया गया, जिससे किसी को तुरंत शक नहीं हुआ।
एसआईटी ने 27 अप्रैल से 5 मई 2026 के बीच की सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें कई बार आरोपितों को चढ़ावे की नकदी छिपाते हुए देखा गया। जांच टीम अब 45 दिन से पहले की रिकॉर्डिंग का बैकअप भी जुटाने की कोशिश कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी का सिलसिला कब से चल रहा था।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि गणना कक्ष में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर थी। कर्मचारियों को नोटों की गड्डियों तक सीधी पहुंच थी, वे अपने मोबाइल और निजी सामान भी अंदर ले जाते थे, जबकि प्रवेश और बाहर निकलते समय उनकी तलाशी नहीं होती थी। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर आरोपित लगातार चढ़ावे की रकम चोरी करते रहे।
फिलहाल इस मामले में आठ आरोपी जेल में बंद हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में और कौन-कौन शामिल था तथा चोरी की कुल रकम कितनी हो सकती है। मामले की जांच अभी भी जारी है।
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