एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा में तीखा सियासी संग्राम: प्रियंका गांधी का सरकार पर हमला, किरेन रिजिजू का पलटवार

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“10 साल में 152 बार पेपर लीक”: प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल; संसदीय कार्य मंत्री बोले- “राहुल गांधी की स्पीच चुराई”
लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस और भारी हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला, वहीं सत्ता पक्ष ने भी उनकी टिप्पणियों का कड़ा जवाब दिया।

राधाकृष्णन कमेटी पर टिप्पणी पर लगे ठहाके
प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में कहा कि साल 2024 में एंटी पेपर लीक कानून लागू होने के बावजूद बड़े आरोपियों और माफियाओं के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि लाठियां छात्रों की पीठ पर नहीं, बल्कि सरकार की साख पर पड़ी हैं।

सलाहकार बदलने की सलाह: प्रियंका ने प्रधानमंत्री को सलाह दी कि नई कमेटियां बनाने के बजाय उन्हें अपने सलाहकार बदलने चाहिए।

राधाकृष्णन कमेटी पर तंज: उन्होंने राधाकृष्णन कमेटी का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें गौमूत्र के विशेषज्ञ को शामिल किया गया है। प्रियंका के इस तंज पर पूरे सदन में ठहाके लगे और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मुस्कुराते नजर आए, जिस पर प्रियंका ने कहा— “सर, मुस्कुरा लीजिए।”

152 बार पेपर लीक का दावा: उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 सालों में 152 बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं और शिक्षा बजट में भी कटौती की गई है।

नए शिक्षा मंत्री पर बयान पर हंगामा, रिजिजू का तंज
भाषण के दौरान प्रियंका गांधी द्वारा नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर सवाल उठाए जाने के बाद सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया।

कार्यवाही से हटाने की मांग: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना किसी प्रमाण के किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है और इस बयान को कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।

“राहुल गांधी की स्पीच चुराई”: किरेन रिजिजू ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि प्रियंका गांधी ने “राहुल गांधी की स्पीच की चोरी कर ली है।” इस बयान के बाद सदन का माहौल और गरमा गया।

राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आया मुद्दा:
एंटी पेपर लीक विधेयक पर हुई इस तीखी बहस ने देश में शिक्षा, छात्रों के भविष्य और सरकार की जवाबदेही को एक बार फिर बहस के केंद्र में खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि संसद से पारित होने के बाद यह कानून जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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