नई दिल्ली: कई लोगों को सोते समय बोलने या बड़बड़ाने की आदत होती है। कुछ लोग नींद में सिर्फ कुछ शब्द बोलते हैं, जबकि कुछ लोग पूरी बात करते हुए भी नजर आ सकते हैं। अक्सर इसे सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में नींद में बार-बार बोलना किसी स्लीप डिसऑर्डर से भी जुड़ा हो सकता है।
नींद में बड़बड़ाने को क्या कहते हैं?
नींद के दौरान बोलने या बड़बड़ाने की स्थिति को सोमनीलोक्वी (Somniloquy) कहा जाता है। इसे पैरासोमनिया यानी नींद के दौरान होने वाले असामान्य व्यवहारों की श्रेणी में रखा जाता है।
आमतौर पर नींद में बोलना गंभीर समस्या नहीं होती। यह बच्चों और बड़ों दोनों में हो सकता है। कई बार व्यक्ति सपने देखते हुए उनसे जुड़ी बातें बोलने लगता है। कुछ मामलों में नींद में बोलने के साथ हाथ-पैर हिलाने जैसी गतिविधियां भी देखी जा सकती हैं।
नींद में बड़बड़ाने की क्या वजह होती है?
नींद में बोलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सपने, मानसिक तनाव, चिंता और नींद से जुड़ी परेशानियां इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकती हैं।
दिनभर की घटनाओं और भावनाओं को हमारा दिमाग नींद के दौरान भी प्रोसेस करता रहता है। ऐसे में तनाव या चिंता का असर नींद के दौरान बोलने के रूप में दिखाई दे सकता है। कुछ लोगों को बुरे सपने आने पर भी वे नींद में बोलने लगते हैं।
क्या हर बार नींद में बोलना बीमारी का संकेत है?
नहीं। कभी-कभार नींद में बड़बड़ाना आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। लेकिन अगर कोई व्यक्ति लगातार नींद में बोलता है, बार-बार डरावने सपने आते हैं या नींद के दौरान हाथ-पैर चलाने जैसी गतिविधियां करता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर इसकी वजह से नींद प्रभावित हो रही है या दिनभर थकान और नींद महसूस होती है, तो डॉक्टर या स्लीप स्पेशलिस्ट से सलाह लेना उचित हो सकता है।
नींद में बड़बड़ाने से बचने के लिए क्या करें?
नींद की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए कुछ आसान आदतें मददगार हो सकती हैं।
- रोजाना एक निश्चित समय पर सोने और जागने की कोशिश करें।
- पर्याप्त नींद लें और लगातार नींद पूरी न होने दें।
- सोने से पहले चाय और कॉफी का सेवन कम करें।
- शराब का सेवन नींद के करीब करने से बचें।
- सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें।
- बेडरूम का माहौल शांत और आरामदायक रखें।
- तनाव कम करने के लिए सोने से पहले हल्का संगीत, किताब पढ़ना या रिलैक्सेशन एक्सरसाइज कर सकते हैं।
ध्यान रखें: नींद में कभी-कभार बोलना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर यह समस्या लगातार हो रही है या इसके साथ नींद में असामान्य हरकतें भी होती हैं, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।








