अहमदाबाद विमान हादसे से पहले पायलटों के बीच क्या हुई थी बातचीत? AAIB रिपोर्ट में सामने आई अहम जानकारी

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12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे को एक महीने से अधिक का समय हो चुका है, और अब इस हादसे की जांच कर रही विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग से जुड़ी कई अहम जानकारी सामने आई है, जो दुर्घटना के कारणों को समझने में मदद करती है।

पायलटों के बीच क्या हुई बातचीत?

रिपोर्ट के मुताबिक, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में दोनों पायलटों के बीच हुई बातचीत को सुना गया। जब विमान के दोनों इंजन फेल होने के बाद विमान का फ्यूल कटऑफ स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ मोड में बदल गया, तब एक पायलट ने सवाल किया, “तुमने फ्यूल क्यों बंद कर दिया?” इस पर दूसरे पायलट ने जवाब दिया, “मैंने ऐसा नहीं किया।”

यह बातचीत उस समय हुई जब विमान की गति 180 नॉट्स तक पहुँच चुकी थी। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ था क्योंकि इंजन फेल होने के बावजूद पायलटों के पास सही दिशा में प्रतिक्रिया देने के लिए समय बहुत कम था। कॉकपिट में इस प्रकार की बातचीत दर्शाती है कि पायलटों के बीच भ्रम और घबराहट का माहौल था।

हादसे के समय के पायलटों का अनुभव

इस हादसे में एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI171 के नियंत्रण में दो पायलट थे – कैप्टन सुमीत सभरवाल और प्रथम अधिकारी क्लाइव कुंदर। इन दोनों पायलटों का अनुभव बहुत ही शानदार था।

  • कैप्टन सुमीत सभरवाल: 56 वर्षीय कैप्टन सभरवाल के पास 15,600 से अधिक उड़ान घंटे थे, जिसमें से 8,500 घंटे से अधिक बोइंग 787 विमान पर उड़ान भरने का अनुभव था।

  • प्रथम अधिकारी क्लाइव कुंदर: 32 वर्षीय क्लाइव कुंदर के पास 3,400 से अधिक उड़ान घंटे थे और वह 2017 से एयर इंडिया के साथ जुड़े हुए थे।

दोनों पायलटों ने बोइंग 787 विमान को उड़ाने के लिए सभी आवश्यक प्रमाण पत्र और योग्यता हासिल की थी, लेकिन इसके बावजूद हादसा हुआ, जिससे सवाल उठते हैं कि क्या यह सिर्फ तकनीकी कारणों या मानवीय भूल का परिणाम था।

हादसा और उसकी भयावहता

यह दुर्घटना भारतीय विमानन इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में से एक मानी जा रही है। विमान ने भारतीय समयानुसार दोपहर 1:38:39 बजे उड़ान भरी और महज 27 सेकंड बाद ही पायलटों में से एक ने ‘मेडे- मेडे- मेडे’ संदेश दिया। यह संकेत था कि विमान में कुछ गंभीर तकनीकी समस्या आ गई थी।

विमान का विमानन मार्ग पूरी तरह से प्रभावित हुआ और दुर्घटना के परिणामस्वरूप 260 लोगों की जान चली गई। इस हादसे में केवल एक यात्री ही जीवित बच सका, जबकि बाकी 242 यात्री और चालक दल के सदस्य घटनास्थल पर ही मारे गए।

आखिरकार, क्या हुआ?

यह हादसा बोइंग 787 विमान से जुड़ी पहली घटना थी जिसमें विमान पूरी तरह से नष्ट हो गया। इसने यह भी साबित कर दिया कि दुर्घटना के कारण केवल विमान के तकनीकी पहलू ही नहीं, बल्कि पायलटों की तत्परता और उनकी प्रतिक्रिया भी महत्त्वपूर्ण होती है।

AAIB की रिपोर्ट के बाद यह माना जा सकता है कि कई फैक्टर्स ने इस दुर्घटना को जन्म दिया – जिसमें इंजन फेल होना और पायलटों के बीच संवाद में हुई थोड़ी सी कमी प्रमुख कारण हो सकते हैं।

अंत में, क्या सिखने को मिला?

इस हादसे ने विमानन उद्योग में सुरक्षा मानकों और पायलट प्रशिक्षण की समीक्षा करने की जरूरत को उजागर किया है। वहीं, कॉकपिट में पायलटों के बीच खुली और स्पष्ट संवाद की अहमियत भी सामने आई है।

इस हादसे की और अधिक जांच-पड़ताल से यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकेगा और विमानन सुरक्षा को नई दिशा मिलेगी।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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