West Bengal Politics: ‘विरोधी’ TMC और CPI(M) आए साथ! SIR विवाद को लेकर ममता बनर्जी और M.A. बेबी में फोन पर चर्चा

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक-दूसरे की कट्टर विरोधी मानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के बीच अचानक बढ़ी नजदीकियों ने देश का सियासी पारा बढ़ा दिया है। एसआईआर (SIR) विवाद और चुनाव आयोग (EC) की कार्यप्रणाली को लेकर दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच सीधी बातचीत शुरू हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और ममता बनर्जी और सीपीआई(एम) के महासचिव एम.ए. बेबी ने शुक्रवार को फोन पर विस्तृत चर्चा की। बातचीत में चुनाव आयोग, हालिया चुनावी प्रक्रियाओं और इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की भावी रणनीति को लेकर विचार-विमर्श हुआ।

INDIA गठबंधन की आपात बैठक बुलाने की मांग

सूत्रों का दावा है कि ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी बातचीत की है। ममता बनर्जी ने राहुल गांधी से ‘INDIA’ गठबंधन की जल्द से जल्द बैठक बुलाने का सुझाव दिया है, जो अगले सप्ताह सोमवार या मंगलवार को आयोजित हो सकती है। हालांकि, इस प्रस्तावित बैठक को लेकर अभी तक सभी दलों की ओर से कोई आधिकारिक साझा बयान जारी नहीं किया गया है।

एम.ए. बेबी ने सभी विपक्षी नेताओं को लिखा था पत्र

ममता बनर्जी और एम.ए. बेबी की इस बातचीत से ठीक दो दिन पहले सीपीआई(एम) महासचिव ने देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं को एक पत्र भेजा था।

पत्र की मुख्य बात: एम.ए. बेबी ने चुनाव आयोग की मौजूदा वर्किंग स्टाइल और SIR प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई थी।

विपक्षी एकजुटता: उन्होंने लिखा था कि चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र की साख को बचाए रखने के लिए पूरे विपक्ष को एक मंच पर आकर तत्काल चर्चा करनी चाहिए।

आयोग के भीतर उठे थे सवाल

यह पूरा सियासी घमासान हाल ही में सामने आई एक विस्तृत रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है। खुलासे के मुताबिक, चुनाव आयोग के भीतर बीते 10 महीनों में कई बार गंभीर मतभेद देखने को मिले।

14 बार दर्ज हुई आपत्तियां: आयोग के दो वरिष्ठ चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर मुख्य निर्णयों और आदेशों पर अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

मुद्दे: ये आपत्तियां नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाने, मतदाताओं के डेटा की सुरक्षा और एसआईआर (SIR) से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर थीं।

बिना जानकारी फैसले का आरोप: रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कई महत्वपूर्ण फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों की पूरी जानकारी के बिना लिए गए थे, जिस पर उन्होंने प्रक्रियात्मक सवाल उठाए थे।

बंगाल में TMC और CPI(M) का संवाद क्यों है ऐतिहासिक?

पश्चिम बंगाल में पिछले तीन दशकों से भी ज्यादा समय से TMC और CPI(M) एक-दूसरे के मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। ऐसे में चुनाव आयोग और एसआईआर जैसे राष्ट्रीय मुद्दे पर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व का एक सुर में आना बेहद अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह बातचीत बंगाल में किसी तरह के चुनावी गठबंधन या साथ चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी समन्वय का हिस्सा है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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