दिल्ली की लैंडफिल साइट्स की वैज्ञानिक सफाई जारी, ओखला-भलस्वा-गाजीपुर से 85-95 एकड़ जमीन पुनः प्राप्त

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की प्रमुख लैंडफिल साइट्स को वैज्ञानिक तरीके से साफ कर उन्हें दोबारा उपयोग में लाने की दिशा में काम लगातार जारी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल की जानकारी देते हुए बताया कि ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल साइट्स से अब तक करीब 85 से 95 एकड़ जमीन पुनः प्राप्त की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, लैंडफिल साइट्स की सफाई से इन क्षेत्रों के आसपास पर्यावरणीय स्थिति में सुधार आया है। इसके साथ ही स्थानीय निवासियों के जीवन की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक असर पड़ा है। लंबे समय से दिल्ली के सामने चुनौती बनी इन कचरा साइट्स को वैज्ञानिक तरीके से साफ करने का उद्देश्य जमीन को दोबारा उपयोग योग्य बनाना और शहर को कचरे के बड़े ढेर से राहत दिलाना है।

ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल पर काम

दिल्ली की ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल साइट्स लंबे समय से शहर के ठोस कचरा प्रबंधन की बड़ी चुनौतियों में शामिल रही हैं। इन साइट्स पर जमा पुराने कचरे को वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए हटाने और जमीन को पुनः प्राप्त करने का काम किया जा रहा है।

अब तक करीब 85-95 एकड़ जमीन को पुनः प्राप्त किए जाने को इस अभियान की अहम उपलब्धि माना जा रहा है। खाली हुई जमीन को भविष्य में हरित क्षेत्र और अन्य सार्वजनिक या सामुदायिक सुविधाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

आसपास के पर्यावरण में सुधार का दावा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि लैंडफिल साइट्स की सफाई का असर केवल जमीन खाली होने तक सीमित नहीं है। इसके चलते आसपास के इलाकों में पर्यावरणीय स्थिति में भी सुधार आया है।

लैंडफिल से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों और कचरे के कारण आसपास रहने वाले लोगों को लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ता था। वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निस्तारण और साइट्स की सफाई से इन क्षेत्रों में प्रदूषण को कम करने में मदद मिल रही है।

वायु गुणवत्ता और भूजल में सुधार

लैंडफिल साइट्स की वैज्ञानिक सफाई से आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार आने और प्रदूषण के स्तर में कमी होने की बात कही गई है। इसके अलावा भूजल की गुणवत्ता में भी सुधार होने का दावा किया गया है।

लैंडफिल साइट्स से पुराने कचरे को हटाना और प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे भविष्य में इन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को भी बेहतर पर्यावरण मिल सकता है।

पुनः प्राप्त जमीन का हो सकता है बेहतर इस्तेमाल

लैंडफिल साइट्स से खाली कराई जा रही जमीन को भविष्य में हरित क्षेत्रों, सार्वजनिक स्थानों और सामुदायिक सुविधाओं के लिए इस्तेमाल करने की संभावनाएं हैं। इससे घनी आबादी वाले दिल्ली शहर में खुले और हरित स्थान बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री ने इस पहल को बीजेपी के कार्य करने के मॉडल से जोड़ते हुए कहा कि यह मॉडल वर्तमान में किए गए वादों को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम करने पर जोर देता है। उनका कहना है कि विकास ऐसा होना चाहिए जो टिकाऊ हो और लंबे समय तक शहर के लिए उपयोगी साबित हो।

दिल्ली को कचरे के पहाड़ों से राहत की कोशिश

दिल्ली में लैंडफिल साइट्स लंबे समय से कचरे के बड़े पहाड़ों के रूप में शहर की पहचान और पर्यावरण दोनों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में वैज्ञानिक तरीके से पुराने कचरे को हटाकर जमीन को पुनः उपयोग में लाने की प्रक्रिया को दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ओखला, भलस्वा और गाजीपुर साइट्स पर जारी यह अभियान पूरा होने के बाद इन क्षेत्रों का इस्तेमाल अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। साथ ही, लैंडफिल के आसपास रहने वाले लोगों को प्रदूषण और कचरे से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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