पंजाब SIR विवाद: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राघव चड्ढा का नाम गायब, ‘राजनीतिक बदले’ का आरोप

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चंडीगढ़: पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। राज्यसभा सांसद और बीजेपी नेता राघव चड्ढा का नाम पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं मिलने के बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चड्ढा का दावा है कि उनके नाम के सामने ‘Shifted’ यानी स्थानांतरित दर्ज किया गया है, जबकि उनका मतदाता पहचान पत्र मोहाली में पंजीकृत है।

चड्ढा ने इस मामले को महज एक प्रशासनिक या लिपिकीय गलती मानने से इनकार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का मामला है और पंजाब की AAP सरकार ने चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल उन्हें निशाना बनाने के लिए किया है। चड्ढा अप्रैल 2026 में बीजेपी में शामिल हुए थे, जबकि इससे पहले वह AAP के राज्यसभा सांसद थे।

‘मेरे नाम के आगे Shifted किसने लिखा?’

राघव चड्ढा ने सवाल उठाया कि आखिर उनके नाम को ‘Shifted’ के तौर पर किस आधार पर चिह्नित किया गया। उनका कहना है कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है। ऐसे में ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनका नाम स्थानांतरित मतदाता के रूप में दर्ज होना गंभीर सवाल खड़े करता है।

चड्ढा ने SIR प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बूथ लेवल ऑफिसर से लेकर AERO, ERO और DEO स्तर तक कई अधिकारी राज्य सरकार के कर्मचारी हैं और उन पर राजनीतिक दबाव डाला जा सकता है। हालांकि, ये उनके आरोप हैं और इन्हें लेकर AAP ने अलग रुख अपनाया है।

AAP ने आरोपों को किया खारिज

राघव चड्ढा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी ने पलटवार किया है। AAP का कहना है कि SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधीन है और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने में पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है। पार्टी ने चड्ढा के आरोपों को खारिज करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश बताया है।

यानी इस पूरे मामले में फिलहाल दो बिल्कुल अलग दावे सामने हैं। एक तरफ राघव चड्ढा इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, जबकि AAP का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग की प्रक्रिया है और राज्य सरकार को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

अभी अंतिम सूची नहीं हुई है जारी

इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि फिलहाल यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है, अंतिम सूची नहीं। SIR के तहत जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट में नहीं हैं या जिनके नाम को लेकर आपत्ति है, उनके लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया उपलब्ध है। चड्ढा ने भी कहा है कि वह SIR के तहत उपलब्ध प्रक्रिया का इस्तेमाल कर अपना नाम दुरुस्त कराने की कोशिश करेंगे।

इसलिए ड्राफ्ट सूची में नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि मामला अंतिम रूप से तय हो गया है। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है और पात्र मतदाता का नाम अंतिम सूची में शामिल किया जा सकता है।

पंजाब की राजनीति में बढ़ी हलचल

राघव चड्ढा के मामले ने पंजाब की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। AAP छोड़कर बीजेपी में जाने के बाद चड्ढा लगातार राज्य की भगवंत मान सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। ऐसे में उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से गायब होने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया में चड्ढा के नाम को लेकर क्या फैसला होता है और अंतिम मतदाता सूची में उनका नाम किस स्थिति में सामने आता है। फिलहाल, राघव चड्ढा इसे राजनीतिक बदले का मामला बता रहे हैं, जबकि AAP ने किसी भी सरकारी हस्तक्षेप से इनकार किया है।

 

Kinni Times
Author: Kinni Times

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