नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस भीषण आपदा में अब तक 734 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 2400 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। आठ प्रमुख प्रभावित जिलों में राहत, बचाव और सर्च ऑपरेशन युद्धस्तर पर जारी है।
ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, संपर्क मार्ग ध्वस्त
जानकारी के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा के समीप ग्लेशियर फटने के बाद भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टानें और मलबा नीचे की ओर आ गया। इसकी चपेट में आने से कई बस्तियां, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। बचाव दलों ने अब तक करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाला है, जिनमें 162 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि, रुक-रुक कर हो रही बारिश राहत कार्यों में बड़ी बाधा बन रही है।
लापता भारतीयों की तलाश और रेस्क्यू
विदेश मंत्रालय के अनुसार, आपदा में फंसे 108 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और 50 अन्य से संपर्क स्थापित हो गया है। हालांकि, 275 भारतीय नागरिक और 128 भारतीय मूल के लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं, तिब्बत (चीन) से 598 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंचे हैं और लगभग 900 भारतीय चीन की सीमा में सुरक्षित हैं।
भारत का बड़ा सहायता अभियान
संकट की इस घड़ी में भारत लगातार पड़ोसी देश की मदद कर रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, भारत अब तक 68.5 टन राहत सामग्री (दवाएं, पोर्टेबल जनरेटर, फूड पैकेट्स और वाटर प्यूरिफायर) भेज चुका है। इसके साथ ही ध्वस्त कनेक्टिविटी को बहाल करने के लिए 230 फीट लंबे मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण सामग्री समेत सात बेली ब्रिजों के उपकरण भी भेजे जा रहे हैं।








