नई दिल्ली (दक्षिण दिल्ली क्षेत्र)- राजधानी दिल्ली के थाना फतेहपुर बेरी क्षेत्र डेरा मंडी और घिटोरनी इलाके में अवैध बोरिंग (भूमिगत जल दोहन) को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायत के अनुसार, कुछ फार्म हाउसों पर फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर बोरिंग कराई जा रही है, जिसमें कथित तौर पर स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत और रिश्वतखोरी शामिल है।
किन जगहों पर लगे आरोप?
शिकायत में दो प्रमुख लोकेशन का जिक्र किया गया है:
अशोक एवेन्यू, डेरा मंडी (नया रोड)
फार्म हाउस नंबर C-286 पर कथित तौर पर जुगाड़ मशीन से अवैध बोरिंग कराई जा रही है।
एक्जीक्यूटिव क्लब ड्राइव, घिटोरनी गांव
फार्म हाउस नंबर 37 पर भी इसी तरह फर्जी परमिशन के आधार पर बोरिंग होने का आरोप है।
इन दोनों मामलों में आरोप है कि बिना वैध अनुमति के भूमिगत जल निकासी की जा रही है, जो कानूनन प्रतिबंधित है।
फर्जी परमिशन और दस्तावेज़ों का खेल
शिकायत के अनुसार:
-बोरिंग के लिए फर्जी परमिशन लेटर तैयार किए गए हैं
-इन दस्तावेज़ों पर ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) भनोट के नकली साइन और सील का इस्तेमाल हुआ है
-परमिशन को वैध दिखाने के लिए सरकारी मुहरों की नकल की गई है
-यह पूरा मामला दस्तावेज़ों की जालसाजी और प्रशासनिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।
रिश्वतखोरी और अधिकारियों की कथित भूमिका
शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि:
-बीट ऑफिसर (राम रतन) पर रिश्वत लेकर अवैध बोरिंग की अनुमति देने का आरोप
-थाना फतेहपुर बेरी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत का दावा
-BDO, SDM (छतरपुर), और अन्य प्रशासनिक इकाइयों पर भी सवाल
अवैध बोरिंग क्यों है गंभीर मुद्दा?
दिल्ली में भूमिगत जल स्तर पहले से ही संकट में है। ऐसे में:
-अवैध बोरिंग से जल स्तर तेजी से गिरता है
-पर्यावरण संतुलन प्रभावित होता है
-सरकारी नियमों और जल संरक्षण नीतियों का उल्लंघन होता है
दिल्ली में बिना अनुमति बोरिंग कराना कानूनी अपराध है, जिस पर जुर्माना और कार्रवाई का प्रावधान है।
कानून क्या कहता है?
दिल्ली में बोरिंग कराने के लिए:
-संबंधित प्राधिकरण से वैध अनुमति अनिवार्य है
-जल बोर्ड और भूजल प्राधिकरण के नियम लागू होते हैं
-नियमों के उल्लंघन पर सीलिंग, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई संभव है
-प्रशासन की जिम्मेदारी और अगला कदम
ऐसे मामलों में जरूरी है कि:
-शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो
-फर्जी दस्तावेज़ों की फोरेंसिक जांच कराई जाए
-दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई हो
डेरा मंडी और घिटोरनी में सामने आए ये आरोप केवल अवैध बोरिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सिस्टम में संभावित भ्रष्टाचार और नियमों के दुरुपयोग की ओर भी संकेत करते हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह पर्यावरण और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।




