नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर केंद्र सरकार ने प्रक्रिया को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता से जुड़े आवेदनों की जांच और उन्हें मंजूरी देने के लिए कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिला कलेक्टर्स (DM) को सक्षम अधिकारी के रूप में अधिसूचित कर दिया है।
कलेक्टरों को मिली अहम जिम्मेदारियां
इस फैसले के तहत गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जिला कलेक्टरों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
दस्तावेज़ सत्यापन: कलेक्टर आवेदकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की गहनता से जांच करेंगे और उनकी पात्रता सुनिश्चित करेंगे।
निष्ठा की शपथ: पात्रता सिद्ध होने के बाद कलेक्टर आवेदक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित कराकर निष्ठा की शपथ दिलाएंगे।
निर्णय लेने का अधिकार: यदि आवेदक सभी कानूनी शर्तों को पूरा करता है, तो कलेक्टर उसे भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेंगे।
प्रक्रिया में तेजी लाने की कवायद
पहले यह प्रक्रिया उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त समितियों तक सीमित रहने के कारण धीमी गति से चल रही थी। नई व्यवस्था के तहत ऑनलाइन आवेदन मिलने पर ‘फॉर्म 9’ में रसीद जारी की जाएगी और जिला स्तर पर ही जांच पूरी की जाएगी। यदि कोई आवेदक पर्याप्त अवसर मिलने के बाद भी शपथ लेने या हस्ताक्षर करने नहीं आता है, तो कलेक्टर के पास आवेदन खारिज करने का अधिकार होगा।
गृह मंत्रालय के इस कदम का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती राज्यों में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) के लंबित नागरिकता आवेदनों को जल्द से जल्द निपटाना है।








