नई दिल्ली के असोला शनि धाम रोड पर स्थित 40 साल पुराने मां काली मंदिर में हाल ही में तोड़फोड़ और पवित्रता भंग करने का मामला सामने आया था। आरोप है कि वन विभाग (Forest Department) के गार्ड ताजुद्दीन खान ने मंदिर परिसर में कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचाया और धार्मिक भावनाओं को आहत किया। इस घटना के पीछे डीसीएफ (DCF) अमित पांडे का नाम सामने आया, जिनकी देखरेख में यह कार्रवाई हुई थी।
डीसीएफ अमित पांडे का ट्रांसफर
इस विवाद के बाद डीसीएफ अमित पांडे का ट्रांसफर कर दिया गया है। मां काली के भक्तों और क्षेत्रीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। स्थानीय लोगों का मानना है कि मां काली ने खुद न्याय दिया है और जिसने मंदिर की पवित्रता को भंग किया, उसे “प्रसाद” मिल चुका है।
“माता जब देती हैं तो छप्पर फाड़ के देती हैं, और जब लेती हैं तो खाल उतार कर लेती हैं,”
— स्थानीय श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
शिवसेना ने धरना प्रदर्शन किया रद्द
शिवसेना दिल्ली प्रदेश की उप प्रमुख किरण सिंह तंवर ने 7 जुलाई को डीसीएफ कार्यालय, शूटिंग रेंज तुगलकाबाद के बाहर धरना प्रदर्शन का ऐलान किया था। लेकिन अब, डीसीएफ का ट्रांसफर हो जाने के चलते यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है।
श्रद्धालुओं की जीत, न्याय की प्रतीक्षा
इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखाया कि धार्मिक आस्था के खिलाफ उठाए गए कदम लंबे समय तक नहीं टिकते। मां काली के भक्तों का विश्वास है कि देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं। श्रद्धालु अब भी न्याय और मंदिर की पूर्ण मरम्मत की मांग कर रहे हैं।



