नई दिल्ली (साउथ दिल्ली) – राजधानी दिल्ली के एक प्रमुख मार्ग मेहरौली-गुड़गांव रोड पर स्थित सुल्तानपुर मेट्रो पिलर संख्या P.P.3 के पास इन दिनों एक अवैध निर्माण कार्य जनता के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है।स्थानीय निवासी द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार, मुख्य सड़क पर भारी ट्रक और लेंटर डालने वाली विशाल मशीनें खड़ी कर, खुलेआम निर्माण कार्य किया जा रहा है। इससे:
रोड पर भीषण ट्रैफिक जाम लग रहा है,
आसपास वायु और ध्वनि प्रदूषण तेज़ी से बढ़ रहा है,
और जनता के लिए आवाजाही मुश्किल हो गई है।
जनता परेशान, जिम्मेदार बेपरवाह?
शिकायतकर्ता ने इस बारे में पुलिस कंट्रोल रूम (112) पर कॉल कर सूचना दी।
पीसीआर वाहन मौके पर पहुँचा, लेकिन:
मशीनें हटाई नहीं गईं
ट्रैफिक क्लीयर नहीं किया गया
निर्माण रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई
मामले की जांच के लिए नियुक्त एएसआई परमजीत (थाना वसंत कुंज साउथ) ने शिकायतकर्ता को कॉल कर कहा – “अवैध निर्माण कहाँ हो रहा है?”
जब पूरी स्थिति विस्तार से बताई गई तो उन्होंने मशीन हटवाने से इनकार कर दिया।
हाई कोर्ट का आदेश, लेकिन Selective Action?
गौर करने वाली बात ये है कि कुछ ही दिन पहले इसी रोड पर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर एक अन्य बिल्डिंग में डेमोलिशन की कार्रवाई की गई थी।
लेकिन उसी क्षेत्र में चल रहे इस निर्माण पर न तो कोई कार्रवाई हुई, न ही कोई पूछताछ।
क्या प्रशासन का रवैया चुनिंदा कार्रवाई का संकेत देता है?
क्या बिल्डर लॉबी और पुलिस की मिलीभगत इसमें काम कर रही है?
दिल्ली नगर निगम (MCD) के नियमों के अनुसार, सार्वजनिक सड़क पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करना स्पष्ट रूप से अवैध है।
इसके तहत 5/15 DMC एक्ट के अंतर्गत:
कलंदरा बनाकर मुकदमा दर्ज किया जा सकता है
और तुरंत निर्माण पर रोक लगाई जा सकती है
शिकायतकर्ता ने इस मुद्दे पर निम्नलिखित 9 प्रमुख विभागों/प्रशासकों को लिखित शिकायत भेजी है:
प्रधानमंत्री कार्यालय – @PMOIndia
गृह मंत्रालय – @AmitShah
मुख्यमंत्री दिल्ली – @CMODelhi
उपराज्यपाल दिल्ली – @LtGovDelhi
जॉइंट कमिश्नर, साउथ रेंज
DCP साउथ – @DCPSouthDelhi
डिप्टी कमिश्नर, साउथ
MCD दिल्ली – @MCD_Delhi
थाना वसंत कुंज साउथ – @DelhiPolice
प्रमुख मांगें:
मेंन रोड से भारी मशीनों और ट्रकों को तुरंत हटाया जाए
अवैध निर्माण कार्य पर फौरन रोक लगाई जाए
निर्माणकर्ता पर कानूनी कार्यवाही (कलंदरा बनाकर) की जाए
लापरवाह पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच शुरू की जाए




