Deepfake पर गडकरी का बड़ा एक्शन, Meta-X-Google कोर्ट में

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स मेटा, एक्स (ट्विटर), गूगल और अनजान ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ मानहानि और डीपफेक कंटेंट को लेकर सिविल केस दायर करने की बड़ी राहत दी है। इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने सख्त रुख अपनाया और सोशल मीडिया कंपनियों तथा इंटरनेट इंटरमीडियरीज को आदेश दिया कि वे नितिन गडकरी और उनके परिवार के खिलाफ चलाए जा रहे फर्जी, एआई-जेनरेटेड और संपादित किए गए आपत्तिजनक पोस्ट्स और वीडियो को तुरंत अपने प्लेटफॉर्म से हटाएं।

बार-बार अदालत का दरवाजा न खटखटाना पड़े
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इन कंटेंट को बेहद आपत्तिजनक, अपमानजनक और भ्रामक करार देते हुए कहा कि सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की घटिया सामग्री की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने सोशल मीडिया टेक कंपनियों को सख्त निर्देश दिए कि वे भविष्य में भी ऐसा कोई डीपफेक या मानहानिकारक कंटेंट आने पर खुद संज्ञान लेकर या शिकायत मिलते ही उसे हटाने का एक स्थायी तंत्र तैयार करें, ताकि बार-बार अदालत का दरवाजा न खटखटाना पड़े।

स्वस्थ राजनीतिक आलोचना के खिलाफ नहीं
यह पूरा विवाद E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल) नीति को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दावों के बाद शुरू हुआ। नितिन गडकरी ने अपनी याचिका में 26 फर्जी लिंक्स और एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो का हवाला दिया, जिनमें यह झूठा आरोप लगाया जा रहा था कि उन्होंने और उनके परिवार ने इस नीति के जरिए अनुचित वित्तीय लाभ उठाया है। याचिका में स्पष्ट किया गया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पूरी तरह से केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आती है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्वस्थ राजनीतिक आलोचना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन डीपफेक, वॉयस क्लोनिंग और चरित्र हनन जैसे आपराधिक तरीकों के खिलाफ उन्होंने 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग के साथ यह कानूनी कदम उठाया है।

Kinni Times
Author: Kinni Times