नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। डीएमआरसी देश का पहला मेट्रो संगठन बन गया है, जिसे एसेट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए नवीनतम ISO प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह प्रमाणन मुंबई मेट्रो लाइन-3 के एसेट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए हासिल किया गया है।
डीएमआरसी के मुताबिक, यह वैश्विक मानक किसी संगठन को अपनी परिसंपत्तियों यानी Assets का उनके पूरे जीवनचक्र के दौरान प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से प्रबंधन करने के लिए एक मजबूत ढांचा उपलब्ध कराता है। इसमें परिसंपत्तियों के बेहतर प्रदर्शन, परिचालन से जुड़े जोखिमों और पूरी अवधि में आने वाली लागत के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाता है।
एसेट मैनेजमेंट सिस्टम को किया गया मजबूत
ISO प्रमाणन हासिल करने के लिए डीएमआरसी ने अपने एसेट मैनेजमेंट फ्रेमवर्क को और मजबूत किया। इसके तहत स्ट्रैटेजिक एसेट मैनेजमेंट प्लान को बेहतर बनाया गया और एसेट मैनेजमेंट से जुड़े लक्ष्यों को संगठन की व्यापक प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा गया।
इसके अलावा परिसंपत्तियों से जुड़े जोखिमों के आकलन और उनके पूरे जीवनचक्र के दौरान लागू किए जाने वाले नियंत्रणों को भी मजबूत किया गया। डीएमआरसी ने कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए।
ऑडिट और प्रदर्शन संकेतकों से होगी निगरानी
डीएमआरसी के अनुसार, एसेट मैनेजमेंट सिस्टम की लगातार निगरानी की जा रही है। इसके लिए प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs), ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे परिसंपत्तियों की स्थिति, उनके प्रदर्शन और संभावित जोखिमों की नियमित समीक्षा संभव होगी।
एसेट मैनेजमेंट का यह सिस्टम मेट्रो जैसे बड़े और जटिल परिवहन नेटवर्क के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे उपकरणों और अन्य महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की बेहतर निगरानी, रखरखाव और समय पर सुधार में मदद मिलती है। साथ ही लंबे समय में परिचालन लागत और जोखिम को नियंत्रित करने में भी सहायता मिल सकती है।
मुंबई मेट्रो लाइन-3 के संचालन की जिम्मेदारी
डीएमआरसी वर्तमान में मुंबई मेट्रो लाइन-3 के 33.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के परिचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रहा है। इसी कॉरिडोर के एसेट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए यह ISO प्रमाणन हासिल किया गया है।
डीएमआरसी की यह उपलब्धि न केवल संगठन की तकनीकी और प्रबंधन क्षमता को दर्शाती है, बल्कि देश में मेट्रो परिसंपत्तियों के आधुनिक और व्यवस्थित प्रबंधन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।








