नई दिल्ली: बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे शहरीकरण के बीच वर्ष 2047 तक दिल्ली के सामने ठोस कचरे के निस्तारण की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। दिल्ली मास्टर प्लान 2047 (MPD 2047) में अनुमान लगाया गया है कि राजधानी में रोजाना निकलने वाला ठोस कचरा मौजूदा करीब 13,500 टन से बढ़कर 2047 तक 25,764 टन प्रतिदिन हो सकता है। यानी आने वाले वर्षों में दिल्ली में रोजाना निकलने वाले कचरे की मात्रा लगभग दोगुनी होने की संभावना है।
अभी सिर्फ 47.5 फीसदी कचरा हो रहा है प्रोसेस
मास्टर प्लान के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में दिल्ली में पैदा होने वाले ठोस कचरे का करीब 47.5 प्रतिशत ही प्रसंस्कृत किया जा रहा है। इसका मतलब है कि आधे से ज्यादा कचरे के उचित निस्तारण की चुनौती अभी भी बनी हुई है।
राजधानी में बड़ी मात्रा में कचरा अभी भी लैंडफिल साइट्स पर पहुंचता है। भलस्वा, गाजीपुर और ओखला दिल्ली के प्रमुख कचरा निस्तारण केंद्रों में शामिल हैं। लगातार बढ़ती कचरे की मात्रा के कारण इन लैंडफिल साइट्स पर दबाव भी बढ़ रहा है।
लैंडफिल के बजाय कचरे को संसाधन बनाने पर जोर
MPD 2047 में कचरे के पारंपरिक लैंडफिल मॉडल से आगे बढ़ने की योजना बनाई गई है। मास्टर प्लान में कचरे को सिर्फ समस्या के तौर पर देखने के बजाय उसे उपयोगी संसाधन में बदलने पर जोर दिया गया है।
इसके तहत ठोस कचरे के प्रसंस्करण, ऊर्जा उत्पादन, जैविक कचरे से गैस बनाने और निर्माण एवं ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे के पुनर्चक्रण पर ध्यान दिया जाएगा। अलग-अलग प्रकार के कचरे के लिए आवश्यक प्रसंस्करण क्षमता विकसित करने का खाका भी तैयार किया गया है।
दो नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का प्रस्ताव
दिल्ली की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए मास्टर प्लान में दो नए वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन दोनों संयंत्रों की कुल क्षमता 5,000 टन प्रतिदिन होगी।
इन संयंत्रों में ऐसे कचरे का इस्तेमाल करने की योजना है, जिसे सामान्य तरीके से दोबारा इस्तेमाल या रिसाइकिल करना संभव नहीं है। कचरे से ऊर्जा बनाने की व्यवस्था से लैंडफिल साइट्स पर जाने वाले कचरे की मात्रा कम करने में मदद मिल सकती है।
कचरे से ऊर्जा और गैस उत्पादन पर जोर
मास्टर प्लान में जैविक कचरे से गैस बनाने और ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की भी योजना है। इसके अलावा निर्माण मलबे के पुनर्चक्रण पर जोर देकर निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले कचरे को दोबारा उपयोग में लाने की दिशा में काम किया जाएगा।
इस तरह MPD 2047 के तहत दिल्ली के कचरा प्रबंधन को केवल कचरा हटाने तक सीमित रखने के बजाय प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने की कोशिश की गई है। अगर योजना के मुताबिक व्यवस्थाएं विकसित होती हैं, तो भविष्य में दिल्ली के लिए बढ़ता कचरा केवल चुनौती नहीं बल्कि ऊर्जा और संसाधन का स्रोत भी बन सकता है।








