दक्षिण दिल्ली के छतरपुर क्षेत्र में कानून व्यवस्था और निर्माण मानकों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ती नज़र आ रही हैं। सत्यार्थी मंदिर के पास 100 फुटा छतरपुर मेन रोड पर स्थित प्लॉट नंबर D-88 पर, डीडीए द्वारा नोटिफाइड जमीन पर बेसमेंट समेत छह मंजिला अवैध इमारत का निर्माण दिन-रात जारी है।
नियमों को ताक पर रखकर चल रहा निर्माण
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस निर्माण को लेकर न कोई अनुमति है, न कोई सुरक्षा मानक अपनाए जा रहे हैं। यह क्षेत्र डीडीए द्वारा नोटिफाइड है, जहाँ इस तरह के निर्माण पर स्पष्ट रूप से रोक है। बावजूद इसके, बिल्डिंग में न सिर्फ बेसमेंट बनाया जा रहा है, बल्कि छठीं मंजिल तक का निर्माण भी धड़ल्ले से हो रहा है।
“संत्रियों से लेकर मंत्रियों तक मिलीभगत”
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस अवैध निर्माण के पीछे एक संगठित भूमाफिया नेटवर्क काम कर रहा है। शिकायतें यह भी हैं कि पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीय निकाय कर्मी और राजनेता — सभी ने मोटी रिश्वत लेकर इस निर्माण को अनदेखा किया है।
“यहाँ रिश्वतखोरी का ऐसा बोलबाला है कि कोई भी अधिकारी ज़मीन पर आकर जाँच करने की हिम्मत नहीं करता।” – एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।
पुलिस और प्रशासन मौन क्यों?
इतने बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध निर्माण पर अब तक न तो एमसीडी की कोई कार्रवाई हुई है, न ही पुलिस द्वारा कोई रोक लगाई गई है। इलाके के लोगों का आरोप है कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है, और कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है।

छतरपुर: पहले और अब
कभी शांत और हरियाली से भरपूर छतरपुर इलाका आज बिल्डरों और भूमाफियाओं का गढ़ बनता जा रहा है। अवैध कॉलोनियाँ, गैरकानूनी मंज़िलें और बिना नक्शा पास किए हुए निर्माण कार्य यहाँ आम बात हो गई है।
छतरपुर विधानसभा में कानून-व्यवस्था की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।
जनता की माँग
इलाके के लोगों ने मांग की है कि:
इस अवैध निर्माण को तुरंत रोका जाए
जिम्मेदार अधिकारियों और बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की जाए
पूरे छतरपुर क्षेत्र में अवैध निर्माणों की स्वतंत्र जांच कराई जाए
रिश्वतखोरी के आरोपों की भी गहन जांच हो
क्या छतरपुर विधानसभा अब ‘रिश्वतपुर’ बनता जा रहा है?
यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब प्रशासन और नेताओं को देना होगा।



