राजधानी दिल्ली में सोमवार को CJP के संसद मार्च के दौरान हालात उस समय बिगड़ गए, जब प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प, पथराव और तोड़फोड़ में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि करीब 60 प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आई हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है और उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, घायलों में कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। इनमें विशेष पुलिस आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, डीसीपी, अतिरिक्त डीसीपी, एसीपी रैंक के अधिकारी और महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
पुलिस का क्या कहना है?
पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों को कई बार शांतिपूर्वक हटने और लागू निषेधाज्ञा का पालन करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पुलिस पर पथराव किया और सरकारी वाहनों व सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
पुलिस के मुताबिक, हिंसा में 15 से 20 सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में करीब 70 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
वरिष्ठ अधिकारी भी हुए घायल
झड़प के दौरान उत्तरी जिले के डीसीपी राजा बांठिया और नई दिल्ली जिले के अतिरिक्त डीसीपी आनंद कुमार मिश्रा भी गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, राजा बांठिया के हाथ और पैर में फ्रैक्चर आया है। इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि आनंद कुमार मिश्रा का इलाज अभी आरएमएल अस्पताल में चल रहा है।
पुलिस आयुक्त ने लिया हालचाल
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने अस्पताल पहुंचकर घायल पुलिसकर्मियों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। पुलिस ने बताया कि सभी घायलों की मेडिको-लीगल जांच (एमएलसी) कराई जा रही है।
पुलिस का कहना है कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंगा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।







