दिल्ली के छतरपुर एनक्लेव में 100 फीट रोड स्थित प्लॉट नंबर D-93 (क्षेत्रफल लगभग 1000 गज) पर बड़े पैमाने पर बिना अनुमति और अवैध रूप से बेसमेंट निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने संबंधित विभागों और उच्च अधिकारियों को प्रमाणों सहित विस्तृत शिकायत पत्र भेजा है।
निर्माण स्थल पर भारी मशीनों का प्रयोग
शिकायत के अनुसार, निर्माण स्थल पर पोकलैंड और जेसीबी जैसी भारी खुदाई मशीनें लगातार दिन-रात चलाई जा रही हैं। इससे क्षेत्र में ध्वनि और वायु प्रदूषण, भूजल स्तर को नुकसान, आसपास की इमारतों में कंपन और संरचनात्मक खतरा, स्थानीय निवासियों की नींद और जीवनशैली प्रभावित हो रही है।
न DDA का प्लान पास, न MCD की अनुमति
शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि:
यह ज़मीन DDA द्वारा अधिसूचित (Notified Land) है
न तो इस पर कोई मंजूरशुदा नक्शा है, न ही MCD से निर्माण की अनुमति
फिर भी बिना रोक-टोक के कार्य चल रहा है
प्रासंगिक कानूनों का उल्लंघन:
दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 की धारा 14 और 29
नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 343 और 345A
पुलिस और विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप
शिकायत में स्थानीय थाना मैदानगढ़ी, MCD साउथ जोन, DDA इंजीनियर, और राजस्व विभाग पर आरोप लगाया गया है कि शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। करोड़ों रुपये की रिश्वत लेकर जानबूझकर अवैध निर्माण को नजरअंदाज किया गया। यह संगठित भ्रष्टाचार का मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है
प्रासंगिक कानून:
IPC की धारा 217 और 218 (कर्तव्य में लापरवाही या अपराध छुपाना)
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 13(1)(d), 17
शिकायतकर्ता की मांगें:
1. CBI जांच कराई जाए
कई विभागों की मिलीभगत होने के कारण केवल CBI जैसी निष्पक्ष एजेंसी ही सही जांच कर सकती है
2. स्थानीय पुलिस और DDA/MCD अधिकारियों को निलंबित किया जाए
IPC और सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई हो
3. खुदाई में प्रयुक्त मशीनों को जप्त किया जाए
CrPC की धारा 102 और Delhi Police Act के तहत
4. बेसमेंट खुदाई को तत्काल रोका जाए
संयुक्त निरीक्षण के बाद अवैध निर्माण गिराया जाए – DDA अधिनियम और MCD एक्ट के तहत
5. थानेदार के खिलाफ विजिलेंस जांच हो
जानबूझकर निष्क्रियता बरतने पर पुलिस अधिनियम, 1978 के तहत कार्रवाई हो
6. NGT में पर्यावरणीय याचिका दाखिल की जाए
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धाराओं के उल्लंघन के लिए
यह मामला न केवल दिल्ली के नियोजित विकास नियमों के उल्लंघन का है, बल्कि यह प्रशासनिक और पुलिस तंत्र की मिलीभगत का गंभीर उदाहरण भी है। यदि इस तरह के मामलों पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में यह राजधानी की संरचनात्मक सुरक्षा और पर्यावरण के लिए घातक साबित हो सकता है।




