MPD-2047: यमुना के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में नो-एक्टिविटी जोन की मांग, हरित-नीले ढांचे पर जोर

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नई दिल्ली: दिल्ली के पर्यावरण और शहरी विकास को लेकर मास्टर प्लान दिल्ली-2047 (MPD-2047) के तहत हितधारकों की बैठक में यमुना के पुनर्जीवन, बाढ़ क्षेत्र के संरक्षण और हरित-नीले ढांचे को मजबूत करने पर चर्चा हुई। बैठक में यमुना के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र की पहचान कर संवेदनशील हिस्सों में गतिविधियों को सीमित करने की जरूरत पर जोर दिया गया।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की ओर से आयोजित हितधारक परामर्श प्रक्रिया में MPD-2047 के पर्यावरण और यमुना से जुड़े प्रावधानों पर सुझाव लिए जा रहे हैं। DDA के अनुसार, मास्टर प्लान 2047 को 20 अगस्त 2026 को औपचारिक रूप से पेश किया गया था और इसके क्रियान्वयन को लेकर हितधारकों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं।

यमुना के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र पर विशेष ध्यान

बैठक में यमुना के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र की पहचान कर संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता सामने आई। आधिकारिक MPD-2047 प्रावधानों में सक्रिय बाढ़ क्षेत्र को नो-कंस्ट्रक्शन जोन के रूप में रखने की बात कही गई है। साथ ही, संबंधित क्षेत्रों में केवल निर्धारित और स्वीकृत गतिविधियों की अनुमति का प्रावधान है।

इसका उद्देश्य बाढ़ के जोखिम वाले क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण और ऐसी गतिविधियों को सीमित करना है, जिनसे नदी और उसके आसपास के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है।

यमुना, आर्द्रभूमि और जल निकायों के संरक्षण पर जोर

हितधारकों ने यमुना के साथ-साथ आर्द्रभूमि, जल निकायों और प्राकृतिक नालों के संरक्षण को शहरी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया। चर्चा में यह सुझाव भी सामने आया कि दिल्ली के प्राकृतिक संसाधनों को अलग-अलग समस्याओं के रूप में देखने के बजाय एक समग्र पर्यावरणीय रणनीति के तहत विकसित किया जाना चाहिए।

MPD-2047 में हरित और नीले ढांचे यानी Green-Blue Infrastructure को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसमें जल संसाधनों, हरित क्षेत्रों, जैव विविधता और प्राकृतिक प्रणालियों को एक-दूसरे से जोड़कर देखने की अवधारणा शामिल है।

प्रदूषण से निपटने के लिए एकीकृत रणनीति

बैठक में दिल्ली के प्रदूषण को केवल एक क्षेत्र की समस्या मानने के बजाय उसके विभिन्न स्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों से जोड़कर समाधान तैयार करने की जरूरत बताई गई। इसमें जल संरक्षण, हरित क्षेत्र, जैव विविधता और यमुना के पुनर्जीवन को एक साथ लेकर आगे बढ़ने पर जोर दिया गया।

इस तरह की एकीकृत योजना का उद्देश्य दिल्ली के पर्यावरणीय संतुलन को बेहतर करना और भविष्य में जलवायु एवं बाढ़ से जुड़ी चुनौतियों के प्रति शहर की क्षमता को मजबूत करना है।

शहरी जंगल और जैव विविधता को मिलेगा बढ़ावा

MPD-2047 में दिल्ली के शहरी जंगलों और जैव विविधता को मजबूत करने के साथ हरित क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने पर भी जोर है। स्थानीय प्रजातियों को बढ़ावा देने और प्रकृति आधारित समाधान अपनाने की दिशा में काम करने की बात कही गई है।

हरित क्षेत्रों के आपस में जुड़े नेटवर्क से शहर में जैव विविधता को संरक्षण मिलने के साथ पर्यावरणीय गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है।

ई-कचरा प्रबंधन और ट्रैफिक पर भी चर्चा

हितधारक बैठक में ई-कचरा प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने की जरूरत भी सामने आई। इसके अलावा दिल्ली में बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित और एकीकृत रणनीति तैयार करने पर भी सुझाव दिए गए।

MPD-2047 के तहत DDA लगातार विभिन्न वर्गों और संस्थाओं के साथ परामर्श बैठकें कर रहा है। इन बैठकों का उद्देश्य मास्टर प्लान के प्रावधानों को जमीन पर लागू करने के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों और सुझावों को समझना है।

दिल्ली को अधिक रहने योग्य बनाने का लक्ष्य

मास्टर प्लान दिल्ली-2047 में पर्यावरण संरक्षण, बेहतर कनेक्टिविटी, हरित क्षेत्रों के विस्तार और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को शहरी विकास के साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।

यमुना के बाढ़ क्षेत्र, आर्द्रभूमि, जल निकायों, प्राकृतिक नालों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण पर जोर इसी व्यापक योजना का हिस्सा है। आने वाले समय में इन प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना जाएगा।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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