मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने 28 सितंबर को कहा कि संगठन अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव को लेकर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त से इस मामले में सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की।
CJP ने 24 सितंबर को ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था और इसके बाद देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी थी। अब संगठन ने कहा है कि 2 अक्टूबर से देशभर में प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे, और इस्तीफे की मांग जारी रहेगी। CJP ने इसके साथ ‘Election Commission Thik Karo’ अभियान भी शुरू किया है।
SIR में 13 करोड़ से ज्यादा नामों का दावा
CJP का दावा है कि SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर हुए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की 25 सितंबर की रिपोर्ट में भी SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटने की बात कही गई है।
हालांकि, 13 करोड़ का आंकड़ा विवाद का विषय है और इसे CJP तथा संबंधित रिपोर्टों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम बाहर होना अपने आप में स्थायी रूप से मतदान का अधिकार समाप्त होना नहीं माना जा सकता, क्योंकि पुनरीक्षण प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की व्यवस्था होती है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों पर भी सार्वजनिक बहस चल रही है। ऐसे में CJP की मांग और 2 अक्टूबर से प्रस्तावित प्रदर्शन ने चुनाव आयोग तथा मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।







