सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों पर दोहरी मार, छूटा ठिकाना तो अटकी सिक्योरिटी; नए कमरे के लिए फिर जुटाने पड़ रहे पैसे

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सत्य निकेतन हादसे के बाद इलाके में रहने वाले छात्रों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हादसे के चलते कई छात्रों को अपने पीजी खाली करने पड़े। अब उनके सामने सुरक्षित ठिकाना तलाशने के साथ-साथ पुराने पीजी में जमा सिक्योरिटी राशि वापस लेने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए हादसे ने छात्रों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कल तक जिन कमरों में छात्र रहकर पढ़ाई कर रहे थे, उन्हें अब अचानक खाली करना पड़ा। कई छात्र नए पीजी या फ्लैट की तलाश में भटक रहे हैं।

मुश्किल यह है कि पुराने पीजी में जमा सिक्योरिटी राशि समय पर वापस नहीं मिल रही। ऐसे में छात्रों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। एक तरफ पुरानी सिक्योरिटी अटकी हुई है, वहीं दूसरी तरफ नए ठिकाने के लिए एडवांस, किराया और सिक्योरिटी के रूप में दोबारा रकम जुटानी पड़ रही है।

पुराने पैसे अटके, नए कमरे के लिए फिर खर्च

सीमित बजट में दिल्ली में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी बढ़ा रहा है। पुराने पीजी से सिक्योरिटी वापस लेने के लिए छात्रों को संचालकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि अचानक कमरा खाली करने के बाद सुरक्षित जगह तलाशना पहले ही चुनौती है। ऊपर से पुराने पीजी की रकम अटकी होने के कारण नए कमरे के लिए पैसे जुटाना मुश्किल हो रहा है। छात्रों को आशंका है कि आर्थिक दबाव का असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

प्रतिष्ठा की 45 दिन की सिक्योरिटी भी नहीं मिली

मैत्री कॉलेज की छात्रा प्रतिष्ठा ने बताया कि पीजी खाली करने के बाद उसने संचालक से अपनी सिक्योरिटी राशि वापस मांगी थी। संचालक की ओर से बताया गया था कि पीजी खाली करने के 45 दिन बाद सिक्योरिटी वापस करने का नियम है।

प्रतिष्ठा के मुताबिक, 9 सितंबर को 45 दिन पूरे हो गए, लेकिन इसके बावजूद उसे उसकी रकम वापस नहीं मिली। अब आरोप है कि संचालक उसके फोन का जवाब भी नहीं दे रहा है।

अमित के दोस्तों के सामने भी खड़ी हुई यही परेशानी

छात्र अमित ने बताया कि हादसे के बाद सुरक्षा कारणों से उसके कई दोस्तों को भी पीजी खाली करना पड़ा। जब उन्होंने सिक्योरिटी वापस मांगी तो संचालकों ने किरायेदारी के समय तैयार किए गए शपथ पत्र का हवाला देकर रकम लौटाने से इनकार कर दिया।

अमित के मुताबिक, पुराने पीजी की रकम फंसी होने के कारण नए पीजी या फ्लैट में जाने के लिए दोबारा पैसे जुटाना मुश्किल हो रहा है।

10 दिन का किराया काटकर लौटाए 6 हजार रुपये

सत्य निकेतन स्थित पीजी में छात्रों और मकान मालिकों के बीच किराये और सिक्योरिटी राशि को लेकर विवाद के मामले भी सामने आए हैं।

ऐसे ही एक मामले में छात्र मयंक और उत्कर्ष ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि पीजी मालकिन ऋतु ने उनकी सिक्योरिटी राशि वापस नहीं की। हालांकि, बुधवार को छात्रों ने बताया कि मकान मालिक ने 10 दिन का किराया काटकर 6,000 रुपये वापस कर दिए हैं।

छात्रों के अनुसार, पीजी में एक बेड का मासिक किराया 9,000 रुपये था।

मुश्किल वक्त में छात्र बन रहे छात्रों का सहारा

इस संकट के बीच छात्रों के बीच एक-दूसरे की मदद की तस्वीर भी सामने आ रही है। जिन छात्रों के पास रहने की जगह है, वे अपने दोस्तों को अपने कमरों में जगह दे रहे हैं। कई छात्र जरूरतमंद साथियों के लिए खाना और जरूरी सामान भी जुटा रहे हैं।

कॉलेजों की ओर से भी कुछ छात्रों के लिए अस्थायी रहने और खाने की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है।

फिलहाल छात्रों की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित ठिकाना और पुराने पीजी में फंसी सिक्योरिटी राशि है। छात्रों का कहना है कि जब तक रहने की व्यवस्था स्थिर नहीं होती और उनकी जमा रकम वापस नहीं मिलती, तब तक सामान्य जीवन और पढ़ाई को पटरी पर लाना मुश्किल रहेगा।

Kinni Times
Author: Kinni Times

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