उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने राजधानी के पीजी, हॉस्टल और किराए के मकानों में रहने वाले लाखों छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद सख्त और विस्तृत आदेश जारी किया है। एलजी के सीधे निर्देश पर हरकत में आई दिल्ली पुलिस ने अपने सभी एसीपी और थानों के एसएचओ को आदेश दिया है कि वे तुरंत छात्र बाहुल्य इलाकों में जाकर उनसे सीधा संवाद स्थापित करें। इस पूरी कवायद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासन ने इसे केवल एक औपचारिक अभियान नहीं रहने दिया है, बल्कि पुलिस के आला अधिकारियों को आगामी 20 सितंबर तक हर हाल में इस पर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने का सख्त अल्टीमेटम दे दिया है, जिससे महकमे में हड़कंप मचा है।
दिल्ली पुलिस द्वारा जारी ताजा आदेश में इस बार केवल निर्देश नहीं दिए गए हैं, बल्कि अधिकारियों की सीधे तौर पर जवाबदेही तय कर दी गई है। आदेश के मुताबिक, आगामी 11 दिनों के भीतर यानी 20 सितंबर तक जमीनी स्तर पर क्या कार्रवाई की गई, कितने छात्रों से संपर्क किया गया और उनकी समस्याओं का क्या निवारण हुआ, इसकी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। एलजी सचिवालय इस पूरी रिपोर्ट की खुद समीक्षा करेगा। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि इस निश्चित समय सीमा के कारण पुलिस को अपने पारंपरिक ढर्रे से निकलकर तुरंत फील्ड में उतरना होगा। इस आदेश का सबसे बड़ा असर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू), जेएनयू, जामिया और मुखर्जी नगर जैसे उन इलाकों में दिखेगा जहां भारी संख्या में छात्र और विशेष रूप से देश भर से आई छात्राएं पीजी या किराए के कमरों में रहती हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि इन संबंधित क्षेत्रों के एसएचओ और एसीपी खुद छात्र आवासों, यूनिवर्सिटी परिसरों और पीजी का दौरा करेंगे। वे छात्रों के बीच जाकर एक स्ट्रक्चर्ड (व्यवस्थित) बातचीत करेंगे, ताकि पुलिस और छात्र समुदाय के बीच सीधे संवाद का एक मजबूत पुल तैयार किया जा सके।








