नई दिल्ली। दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़े बेदखली विवाद में फिलहाल क्लब को अस्थायी राहत मिली है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट को आश्वासन दिया कि 16 सितंबर तक क्लब के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह मामला सफदरजंग रोड स्थित करीब 27.3 एकड़ परिसर से क्लब को बेदखल करने की प्रक्रिया से जुड़ा है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन के समक्ष हुई। अदालत दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं ने 29 जून को जारी उस कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग की है, जिसके तहत क्लब के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
16 सितंबर तक कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने अदालत के समक्ष कहा कि 16 सितंबर तक कोई coercive action यानी जबरन/दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी। अदालत ने क्लब के सदस्यों को संपदा अधिकारी के समक्ष अपना जवाब दाखिल करने का सुझाव भी दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि याचिकाओं पर जवाब और दलीलों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उन्होंने बेदखली के कारण बताओ नोटिस पर अंतरिम रोक के मुद्दे को सुनवाई के लिए तैयार बताया।
क्या है पूरा विवाद?
दिल्ली जिमखाना क्लब की करीब 27.3 एकड़ जमीन सफदरजंग रोड पर स्थित है। केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने 22 मई 2026 को क्लब की स्थायी लीज समाप्त करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद क्लब को जमीन खाली कर सरकार को वापस सौंपने के लिए कहा गया था। सरकार ने जमीन की जरूरत को रक्षा ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े उद्देश्यों से जोड़ा है।
इसके बाद 29 जून को सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में पूछा गया था कि उसके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न जारी किया जाए।
केंद्र ने हाईकोर्ट में क्या दलील दी?
केंद्र सरकार ने अदालत में दाखिल अपने जवाब में कहा है कि लीज समाप्त होने के बाद सरकार को जमीन अपने कब्जे में लेने से रोकने का कोई कानूनी आधार नहीं है। केंद्र का तर्क है कि सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत संपदा अधिकारी बेदखली की प्रक्रिया चला रहे हैं और इस प्रक्रिया को रोकने के लिए निषेधाज्ञा की मांग उचित नहीं है।
सरकार ने यह भी कहा कि 1928 की स्थायी लीज एक द्विपक्षीय समझौता था और क्लब के व्यक्तिगत सदस्य उस समझौते के पक्षकार नहीं थे। इसलिए सदस्यों को अधिकारियों द्वारा संविदात्मक अधिकारों के इस्तेमाल को रोकने का अधिकार नहीं है।
क्लब की ओर से क्या आपत्ति?
वहीं, क्लब के सदस्यों ने लीज समाप्त करने और बेदखली की प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार द्वारा लीज समाप्ति को आधार बनाकर आगे बढ़ाई जा रही बेदखली प्रक्रिया पर रोक लगनी चाहिए और जब तक विवाद का निपटारा नहीं होता, तब तक क्लब की स्थिति में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। इस विवाद पर अंतिम कानूनी स्थिति अभी अदालत के समक्ष विचाराधीन है।
अब 16 सितंबर पर नजर
फिलहाल केंद्र के आश्वासन के बाद 16 सितंबर तक क्लब के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। अदालत ने क्लब सदस्यों को संपदा अधिकारी के समक्ष अपनी आपत्तियां और जवाब दाखिल करने की राह भी बताई है। अब अगली सुनवाई में हाईकोर्ट के सामने बेदखली नोटिस और उससे जुड़ी अंतरिम राहत के मुद्दे पर आगे की सुनवाई होगी।
दिल्ली जिमखाना क्लब की जमीन को लेकर केंद्र और क्लब सदस्यों के बीच कानूनी विवाद अभी जारी है। लीज की वैध समाप्ति, बेदखली की प्रक्रिया और क्लब की याचिकाओं पर अदालत के आगे के रुख से इस मामले की अगली दिशा तय होगी।








