9 टेस्ट और 7-8 जीत की दरकार: गौतम गंभीर और युवा ब्रिगेड के सामने बड़ी चुनौती
भारतीय क्रिकेट टीम एक बार फिर लाल गेंद के क्रिकेट में उतरने के लिए तैयार है। 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज केवल एक द्विपक्षीय मुकाबला नहीं, बल्कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल तक पहुंचने की दिशा में भारत का पहला बड़ा कदम है। WTC पॉइंट्स टेबल में फिलहाल पांचवें स्थान पर मौजूद टीम इंडिया के लिए अब हर मैच बेहद निर्णायक हो गया है।
फाइनल की रेस में बने रहने के लिए भारत को अपने बचे हुए 9 टेस्ट मैचों में से कम से कम 7 या 8 मुकाबलों में जीत दर्ज करनी होगी। भारत को श्रीलंका के खिलाफ 2 टेस्ट, न्यूजीलैंड दौरे पर 2 टेस्ट और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर 5 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है।
कोच गौतम गंभीर की परीक्षा और मुख्य चुनौतियां
गंभीर के लिए अग्निपरीक्षा: पूर्व क्रिकेटर दीप दासगुप्ता के अनुसार, मुख्य कोच गौतम गंभीर की कोचिंग में भारत को न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली हार के बाद रणनीति पर सवाल उठे हैं। यह दौर उनकी असली परीक्षा का है।
बदलाव का दौर: टीम में नए और युवा खिलाड़ियों, विशेषकर शुभमन गिल पर बड़ी जिम्मेदारी होगी, वहीं अनुभवी खिलाड़ियों को मुश्किल परिस्थितियों में अहम भूमिका निभानी होगी।
कड़े मुकाबले: श्रीलंका और न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में जीत दर्ज करना कभी आसान नहीं होता, जबकि ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका इस समय WTC रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।
15 अगस्त से शुरू होने वाला श्रीलंका दौरा तय करेगा कि भारतीय टीम WTC के खिताबी मुकाबले तक पहुंचने के अपने सपने को कितना मजबूत बना पाती है।







