सरकार द्वारा मांगें स्वीकारे जाने के बाद CJP के नेताओं का पहला बयान
नीट (NEET) पेपर लीक आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) एक बार फिर देश भर में चर्चा के केंद्र में है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद अब सबसे बड़ा और अहम सवाल यह उठ रहा है कि क्या CJP भविष्य में एक औपचारिक राजनीतिक दल के रूप में उभरेगी? इस यक्ष प्रश्न पर संगठन के प्रमुख प्रवक्ताओं ने पहली बार मीडिया के सामने आकर अपना रुख स्पष्ट किया है।
“संभावनाओं से इनकार नहीं, लेकिन अभी आराम की जरूरत” – आशुतोष रांका
मीडिया को दिए एक विशेष साक्षात्कार में जब CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका से उनके चुनावी राजनीति में प्रवेश को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बीते कई महीनों से संगठन के लोग दिन-रात सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे। इसलिए फिलहाल उनका प्राथमिक उद्देश्य आंदोलन के इस चरण के बाद कुछ समय आराम करना, अपने परिवार को वक्त देना और भविष्य की रणनीति पर गहराई से मंथन करना है।
“राजनीति में आने का इरादा नहीं, युवाओं की आवाज बनना लक्ष्य” – सौरव दास
वहीं संगठन के दूसरे प्रवक्ता सौरव दास ने पार्टी गठन की खबरों पर कहा कि फिलहाल CJP का चुनाव लड़ने या सक्रिय राजनीति में उतरने का कोई विचार नहीं है।
मौजूदा व्यवस्था पर सवाल: सौरव दास ने कहा कि देश में पहले से ही सैकड़ों राजनीतिक पार्टियां मौजूद हैं, लेकिन वे देश के युवाओं और छात्रों की उम्मीदों पर खरी उतरने में नाकाम रही हैं।
भविष्य की योजना: CJP का मुख्य लक्ष्य इस युवा आंदोलन को देश के कोने-कोने तक पहुंचाना है, ताकि सत्ता के शीर्ष पर चाहे जो भी सरकार बैठे, उसे युवाओं के मुद्दों और मांगों को गंभीरता से सुनना ही पड़े।
राजनीतिक भविष्य पर टिकीं नजरें: यद्यपि CJP नेतृत्व ने फिलहाल चुनाव लड़ने की बात से इनकार किया है, लेकिन भविष्य में राजनीति में उतरने के विकल्प को पूरी तरह से खारिज भी नहीं किया है। फिलहाल CJP खुद को एक मजबूत और गैर-राजनीतिक युवा आंदोलन के रूप में स्थापित रखना चाहती है, हालांकि आने वाले दिनों में इस संगठन का क्या रुख रहता है, इस पर देश के राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर बनी रहेगी।








