नीट परीक्षा विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर मंगलवार को राजधानी दिल्ली में राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च कर 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव समेत कई सांसदों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। कुछ नेताओं को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया, जबकि अन्य को छत्रसाल स्टेडियम भेजा गया। बाद में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी मंदिर मार्ग थाने पहुंचकर हिरासत में लिए गए नेताओं से मिलीं।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार किया। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है और छात्रों के मुद्दे पर जवाब देने से बच रही है।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और गृह सचिव गोविंद मोहन प्रदर्शन स्थल पर राहुल गांधी से बातचीत करने पहुंचे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि सरकार संसद में नीट मामले पर चर्चा कराने को तैयार थी, लेकिन बाद में राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की नई मांग जोड़ दी, जिसके कारण सहमति नहीं बन सकी।
वहीं कांग्रेस ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि सरकार यह तय नहीं कर सकती कि विपक्ष किन मुद्दों पर आवाज उठाएगा। पार्टी का कहना है कि नीट परीक्षा विवाद और छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार जवाबदेह है तथा शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
इसी बीच जंतर-मंतर पर भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी रहा। पूरे घटनाक्रम के बाद नीट परीक्षा विवाद और छात्रों के मुद्दे पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है।








