देश के ग्रामीण इलाकों में रोजगार को लेकर आज यानी 1 जुलाई से एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव हो गया है। बीस साल पुराना ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (MGNREGA) अब इतिहास बन चुका है। इसकी जगह केंद्र सरकार का नया ग्रामीण रोजगार कानून ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025’ (VB-G RAM G) आज से देश भर में पूरी तरह लागू हो गया है।
इस नए कानून के तहत ग्रामीण मजदूरों को अब पहले से ज्यादा दिनों के काम की गारंटी मिलेगी और उनकी दैनिक मजदूरी (दिहाड़ी) में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है।
अब 100 की जगह 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी
नए ‘VB-G RAM G’ कानून के तहत अब पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के बजाय 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक, इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा देना और साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय विजन को रफ्तार देना है। इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 95,692 करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया है।
यूपी-बिहार समेत इन राज्यों के मजदूरों को सबसे ज्यादा फायदा
ऐतिहासिक रूप से जिन राज्यों में मजदूरी दरें कम थीं, वहां इस बार सबसे बड़ी बढ़ोतरी (15 से 25 प्रतिशत तक) की गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, असम और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में अब नई मजदूरी सीधे 300 रुपये प्रतिदिन तय कर दी गई है। वहीं, हरियाणा में देश की सबसे ज्यादा सामान्य मजदूरी दर 409 रुपये प्रतिदिन होगी, इसके बाद गोवा में 406 रुपये और केरल में 401 रुपये प्रतिदिन तय की गई है।








