चीन के बढ़ते सैन्य दबाव और ताइवान स्ट्रेट (ताइवान जलडमरूमध्य) में जारी तनातनी के बीच अमेरिकी प्रशासन ने ताइवान को लेकर अपनी कूटनीतिक नीति पर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप सरकार ने साफ कर दिया है कि ताइवान को लेकर उसकी लंबे समय से चली आ रही बुनियादी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, बीजिंग की आक्रामक सैन्य गतिविधियों को देखते हुए स्वशासित द्वीप ताइवान की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए प्रस्तावित 14 अरब डॉलर (लगभग 14 Billion USD) के नए हथियार पैकेज की फिलहाल गहन समीक्षा की जा रही है।
‘ताइवान संबंध अधिनियम’ के प्रति अमेरिका पूरी तरह प्रतिबद्ध
पूर्वी एशिया और प्रशांत मामलों के लिए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के सहायक विदेश मंत्री माइकल जी. डीसोम्ब्रे ने प्रतिनिधि सभा (हाउस) की विदेश मामलों की उपसमिति के समक्ष पेश होते हुए अमेरिकी नीति को पूरी तरह स्पष्ट किया। डीसोम्ब्रे ने लॉमेकर्स (सांसदों) को संबोधित करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ‘ताइवान संबंध अधिनियम’ (Taiwan Relations Act) और अमेरिका-ताइवान संबंधों को संचालित करने वाले लंबे समय से चले आ रहे नीति-ढांचे के प्रति पूरी तरह से वफादार और प्रतिबद्ध है। सुनवाई के दौरान सहायक विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा, “ताइवान पर हमारी पुरानी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हमारी यह नीति ताइवान संबंध अधिनियम, तीन जॉइंट कम्युनिकेशंस और छह आश्वासनों (Six Assurances) से निर्देशित होती है। हम ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे और वहां की मौजूदा स्थिति (Status Quo) में किसी भी तरह के एकतरफा बदलाव का कड़ा विरोध करते हैं।”
चीन की धमकियों के खिलाफ ताइवान के साथ खड़ी है अमेरिकी संसद
संसद में हुई इस अहम सुनवाई के दौरान ज्यादातर समय ताइवान की सुरक्षा का मुद्दा ही छाया रहा। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों ही दलों के सांसदों ने द्वीप पर चीन के बढ़ते दबाव को रोकने के लिए सैन्य मदद तेज करने और कड़े कदम उठाने की वकालत की। इस सुनवाई की अध्यक्षता कर रही प्रतिनिधि यंग किम ने भी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप सरकार और अमेरिकी कांग्रेस, दोनों ही सीसीपी की रोजाना की धमकियों और जबरदस्ती के खिलाफ ताइवान के साथ मजबूती से खड़े हैं।








