राजधानी दिल्ली में बढ़ते अवैध निर्माण और नगर निगम की कथित लापरवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। दक्षिणी दिल्ली के सैदुलजाब इलाके में पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना के बाद कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने अदालत से मांग की है कि दिल्ली नगर निगम (MCD) को अवैध और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जाए।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में अवैध निर्माणों की समस्या लगातार बढ़ रही है और कई मामलों में प्रशासनिक स्तर पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।
सैदुलजाब हादसे के बाद बढ़ा दबाव
30 मई को दक्षिणी दिल्ली के सैदुलजाब क्षेत्र में एक कथित अवैध पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। इस दर्दनाक हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 से अधिक लोग घायल हुए थे। घटना के बाद अवैध निर्माणों और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
पहले भी दर्ज हुए थे उल्लंघन
एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट के अनुसार, जिस इमारत का हिस्सा ढहा, उसके खिलाफ नगर निगम रिकॉर्ड में वर्ष 2012 से ही अवैध निर्माण के मामले दर्ज थे। वर्ष 2015 में अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण को लेकर भी कार्रवाई दर्ज की गई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा और बाद में चौथी तथा पांचवीं मंजिल भी जोड़ दी गई।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि MCD ने समय रहते भवन को सील करने या निर्माण रोकने जैसे आवश्यक कदम नहीं उठाए, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई?
एमिकस क्यूरी ने अदालत से मांग की है कि MCD को दिल्ली में अवैध निर्माणों और आवासीय परिसरों के अनधिकृत उपयोग का व्यापक सर्वेक्षण कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही सभी भवनों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाए और खतरनाक व अवैध निर्माणों को समयबद्ध तरीके से सील तथा ध्वस्त किया जाए।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि MCD यह बताए कि सैदुलजाब की विवादित इमारत में अवैध निर्माण वर्षों तक कैसे जारी रहा और इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
दिल्ली सरकार और पुलिस से भी मांगी रिपोर्ट
रिपोर्ट में दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से भी हादसे को लेकर की गई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा गया है। साथ ही मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की गई है।







